दिल्ली रिहायशी इलाकों में बने बाज़ारों के सम्पत्ति मालिक नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों के विरोध में एकजुट हो कर बड़े पैमाने पर प्रदर्शन की तैयारी में

Local Shopping Centre

Greater Kailash II M-Block Market, Government’s flip-flop policies have begun sounding a death knell for such local shopping centres

 दिल्ली की कालोनियों के मध्य स्थित विभिन्न बाज़ारों के सम्पत्ति मालिक नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों के विरोध में न केवल एकजुट हो रहे हैं बल्कि बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने के लिए कमर कस रहे हैं। अब तक ऐसा समझा जाता था कि व्यापारी और व्यवसायी समुदाय भाजपा की ओर विशेष झुकाव रखता है परन्तु इन सम्पत्ति मालिकों के आक्रोश से प्रतीत होता है कि यदि केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने शीघ्र कदम नहीं उठाए तो यह आक्रोश सड़कों पर नज़र आएगा। सूत्रों की मानें तो बड़े पैमाने पर दिल्ली प्रदेश के व्यापारी प्रदर्शन की तैयारियों में लगे हैं और विभिन्न लोकल शॉपिंग सैन्टर एकजुट होकर एक मार्केट फेडरेशन बनाने में जुटे हैं जो मोदी सरकार की दोगुली नीतियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करेगी।

जब तक केंद्र सरकार इन सम्पत्ति मालिकों की मांगों को नहीं सुनती और दिल्ली के रिहाएशी इलाकों के बीचो बीच अधिसूचित सड़कों पर स्थित आवासी सम्पत्तियों को व्यवसायिक सम्पत्तियों में बदलने की दरों और लोकल शापिंग सेन्टरों में पहली और दूसरी मंजिल को व्यवसायिक सम्पत्ति में बदलने के लिए अधिसूचित दरों की असमानता समाप्त नहीं करती तब तक दिल्ली भर में यह प्रदर्शन जारी रहेगा। केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ चलाये जाने वाले इस अभियान का नेतृत्व ग्रेटर कैलाश एवं दक्षिण दिल्ली की अन्य पाश कालोनियों के मध्य स्थित लोकल शापिंग सेन्टरों के सम्पत्ति मालिक कर रहे हैं।

मास्टर प्लान के तहत बनी विभिन्न कालोनियों के मध्य लोकल शापिंग सेन्टर विकसित किये गये थे ताकि उन कालोनियों के निवासी अपने घरों के समीप ही अच्छे वातावरण में खरीदारी कर सकें। परन्तु केन्द्र सरकार द्वारा तय किये गये नये नियम इन शापिंग सेन्टरों को बनाने के उद्देश्य को ही बदले दे रहे हैं।

नये नियमों के अनुसार रिहायशी इलाकों में कुछ सड़कों को अधिसूचित किया गया है जहां करीब 6000 रूप्ये वर्ग मीटर के हिसाब से जमा कर के आवासी सम्पत्ति को व्यवसायिक उपयोग में लाया जा सकता है परन्तु लोकल शापिंग सेन्टर में पहली अथवा दूसरी मंजिल को यदि व्यवसायिक उपयोग में लाना है तो उसके लिये तय की गई दरें करीब 89000 रूप्ये प्रति वर्ग मीटर हैं।

दिल्ली भर में स्थित लोकल षापिंग सेन्टरों में सम्पत्ति मालिकों का मानना है कि यह असमानता आवासी क्षेत्रों में व्यसायीकरण को प्रोत्साहित करती है और लोकल शापिंग सेन्टरों में सम्पत्ति के व्यवसायिक उपयोग को न केवल हतोत्साहित करती है बल्कि मास्टर प्लान में इस प्रकार के लोकल शापिंग सेन्टर बनाये जाने के उद्देश्य के भी विपरीत है।

इसके कारण आवासी कालोनियों में न केवल बड़े पैमाने पर व्यवसायीकरण हो रहा है बल्कि वहां का शांतिपूर्ण अस्तित्व खतरे में है। अधिसूचित सड़कों पर भीड़ भाड़ बढ़ गई है और लोग इधर उधर गाड़ियां पार्क कर रहे हैं जिसके नतीजे में जगह जगह यातायात जाम देखने को मिलता है। दूसरी ओर अधिकतर लोकल शापिंग सेन्टरों में वाहनों को समायोजित करने के लिए पर्याप्त पार्किंग उप्लब्ध है। इन कारणों से लोकल शापिंग सेन्टरों से किरायदार उन शापिंग सेन्टरों के बाहर सड़कों का रूख करेंगे और इन शापिंग सेन्टरों का अस्तित्व ही खतरे में पड़ने लगेगा। यही कारण है कि इनका आक्रोश सातवें आसमान पर है और ये शीघ्र बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने की तैयारी में लगे हैं।

इन सम्पत्ति मालिकों की कोई बड़ी मांग नहीं है परन्तु अब तक किसी ने इन पर कान नहीं धरे हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार चाहती है कि यह लोकल शापिंग सेन्टर चलते रहें तो वह या तो अधिसूचित सड़कों पर सम्पत्तियों को व्यवसायिक करने की दरों को बढ़ा कर 89000 रूप्ये वर्ग मीटर करे या लोकल शापिंग सेन्टरों में पहली और दूसरी मंजिल को व्यवसायिक करने की दरों को कम करके 6000 रूप्ये प्रति वर्ग मीटर करे। इसके लिए शहरी विकास मंत्रालय को ज्ञापन और अनुरोध पत्र दिये गये हैं परन्तु इन पर कोई ध्यान नहीं दिया गया।

दिल्ली की कई आरडब्लूए और बाज़ार संघों ने भी विभिन्न स्तरों पर इस मुद्दे को उठाया है परन्तु कोई हल नहीं निकल सका है। इसके चलते समूचे दिल्ली की बाजार संघों को जोड़कर एक मार्किट फेडरेशन बनाने की तैयारी है जो शीघ्र ही प्रदेश व्यापी प्रदर्शन करने जा रहे हैं।

आर0एन0आई0 न्यूज़ नेटवर्क

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