झारखंडः किसान के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने की कोशिश

झारखंड सरकार की किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने के प्रयास कुछ ऐसे ही रहे  कि प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी प्रशंसा किए बिना नहीं रह सके।

मुख्यमंत्री रघुबर दास के नेतृत्व में झारखंड की किसानों के लिए एकल खिड़की सुविधा लागू करने की पहल कुछ ऐसी ही अनूठी है कि हर कोई प्रशंसा किए बिना नहीं रह पा रहा। प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी भी नहीं! यही कारण है कि अपने जमशेदपुर दौरे पर प्रधान मंत्री ने किसानों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरने की झारखंड सरकार की कोशिशों की सराहना की। एक सम्मान समारोह में बोलते हुए उन्होंने क्हा कि ‘‘सभी ने उद्योग जगत में एकल खिड़की की बात सुनी है लेकिन आप के मुख्यमंत्री ने किसानों की सभी समस्याओं को सुलझाने के लिए एकल खिड़की की नई अवधारणा पेश की है। आप लोग भाग्यशाली है कि यहां ऐसी सरकार है जो किसानों के लिए लड़ने और मरने को तैयार है।’’

कहने की आवश्यकता नहीं कि झारखंड की इस पहल का देश के कुछ अन्य राज्य भी अनुसरण करने की तैयारी कर रहे हैं।

झारखंड के किसानों के लिए मुख्यमंत्री रघुबर दास की कोशिशें अभूतपूर्व हैं। इन कोशिशों का उल्लेख करते हुए प्रदेश के कृषि, पशुपालन और सहकारी विभाग की सचिव पूजा सिंघल बताती हैं कि गत ढाई वर्षों में मुख्यमंत्री रघुबर दास के नेतृत्व में उनके विभाग ने कई पहल की हैं। वह बताती हैं कि आने वाले दो वर्षों में उनका विभाग किसानों को लाभ पहुंचाने हेतु कई नए कार्यक्रम चलाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री की एकल खिड़की योजना पर बात करते हुए वह कहती हैं कि ‘‘क़रीब देढ़ साल पहले हमारे माननीय मुख्यमंत्री ने एकल खिड़की योजना को प्रारंभ किया जो देश में एक अनोखी पहल थी और मुझे लगता है कि हम एकमात्र ऐसा राज्य हैं जहां कृषि के लिए एक अलग एकल खिड़की है।’’

कृषि विभाग ने कृषि से संबंधित सभी प्रकार की जानकारी एक ही छत के नीचे मुहैया कराना प्रारंभ कर दिया है। इस योजना के कार्यान्वयन का भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्य ज़िलों को दिया गया है। कई ज़िलों में योजना के सफल संचालन के लिए भव्य सूचना भवन बनाए गए हैं। इन सूचना भवनों में कृषि, गव्य, पशुपालन, मत्स्य, भूमि संरक्षण, कृषि विज्ञान केंद आदि के पदाधिकारी एवं विशेषज्ञ सप्ताह में दो बार बैठते हैं और किसानों की तमाम समस्याओं का समाधान देते हैं।

इसके अतिरिक्त एक फोन एसएमएस करते ही किसानों को कृषि से संबंधित सभी जानकारी दी जा रही है। फसलों में यदि कीड़ा लग जाए, फसलों के लगाने का अनुकूल समय क्या होगा, मछली पालन, पशुपालन, गव्य विभाग की जानकारी, सरकार की विभिन्न योजनाएं जिनसे किसान लाभांवित हो सकते हैं, वे कृषि संबंधी कार्य जिनको अपनाकर वे स्वावलंबी हो सकते हैं, आय वृद्धि के समाधान, पशु यदि बीमार हो जाए तो उसके समाधान और इसके अतिरिक्त गाय पालन, मुर्गी पालन, बकरा पालन, सुअर पालन, बत्तख सहित अन्य जीव जंतु के पालन, टीकाकरण और उपचार की सभी जानकारी पास के सूचना केंद्र में बैठे एक्सपर्ट एक फोन पर मुहैय्या करा रहे हैं।

पूजा सिंघल बताती हैं कि झारखंड में क़रीब 28 लाख किसान खेतों पर निर्भर हैं। कुल 79 लाख हेक्टेयर ज़मीन है जिसमें से 38 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है। इस कृषि योग्य भूमि में से 25 लाख हेक्टेयर भूमि ही खेती के लाएक़ है। क़रीब 13 लाख हेक्टेयर भूमि परती पड़ी है। बहुत ही मत्वांकांक्षी योजना के तहत सरकार ने परती भूमि को उपजाऊ खेतों में बदलने का लक्ष्य निर्धारित किया है जिस पर कार्य प्रारंभ हो चुका है।

किसानों में अधिकाधिक जागरूकता फैले, इसको लेकर सरकार ने कृषि महोत्सव रथ यात्रा की शुरूआत की है ताकि किसानों को कृषि संबंधी उत्कृष्ट जानकारी मिल सके। फसल व बीज उत्पादन, फसल बीमा, फसलों की खरीद-बिक्री आदि मामलों में भी सरकार ने किसानों को सहयोग देना शुरू किया है। किसानों की समस्याओं के समाधान और फसलों के उत्पादन में वृद्धि के लिए किसान मित्रों की नियुक्ति हुई है जो निरंतर प्रयासरत रहते हैं।

जल संचयन, बीज उत्पादन, दलहन उत्पादन, मिट्टी स्वास्थ्य कार्ड, कृषि उपकरण बैंक की स्थापना और कृषि यंत्रों एवं सिंचाई पंप के परिचालन में सौर ऊर्जा का उपयोग वे अन्य योजनाएं हैं जो राज्य में फलीभूत हो रही हैं। राज्य में किसानों के लिए बीज ग्राम की स्थापना की गई है ताकि किसानों को धान के बीज के लिए प्रतीक्षा न करना पड़े। वहीं रबी फसल पर दलहन और तिलहन पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री रघुबर दास द्वारा कृषि क्षेत्र पर स्पेशल फोकस का उल्लेख करते हुए पूजा सिंघल कहती हैं कि पिछले दो वर्षों से हमारे पास अलग कृषि बजट है जिसमें न केवल कृषि बलकि जल संसाधन विभाग, ऊर्जा और ग्रामीण विकास विभाग के विभिन्न घटक, और अन्य संबंधित विभागों को एकत्रित किया गया है ताकि कृषि क्षेत्र में बेहतर कारगुज़ारी दिखाई दे और किसानों की समस्याओं का समाधान हो सके। वह कहती हैं ‘‘सरकार और कृषि विभाग किसानों के विकास के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए इन सब योजनाओं को धरातल पर उतारा गया है। कई अन्य योजनाओं को कार्यान्वित करने की कोशिशें चल रही हैं।’’

इस में कोई संदेह नहीं कि यह सब कार्यक्रम जिनको सरकार ने ज़मीन पर उतारा है इनसे किसानों को अधिक से अधिक लाभ मिल रहे हैं और इन नीतियों के कारण कृषि क्षेत्र में अभूतपूर्व विकास हो रहा है।

जैसा कि मुख्यमंत्री रघुबर दास ने एक मौक़े पर कहा था कि गांव का पानी गांव में तो खेत का पानी खेत में ही रहे इस पर अमल किया जाएगा। इस एक वाक्य में कितनी गहराई थी इस का अंदाज़ा तब हुआ जब मुख्यमंत्री ने राज्य में अच्छी व गुणवत्तायुक्त खेती के लिए विभिन्न नई और अनूठी योजनाओं का क्रियान्वयन प्रारंभ किया ताकि राज्य के किसानों के चेहरों पर हमेशा मुस्कराहट बिखरती रह सके।

 

अज़ीज़ हैदर

(Article exclusively done for Outlook Magazine)

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