पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय – अनुसंधान और तकनीक में आगे बढ़ते क़दम

जैसा कि नाम से ही पता चलता है हम धरती और उसके संसाधनों उनके बचाव और रख-रखाव की बात कर रहे हैं। भारत सरकार का वह सर्वोच्च मंत्रालय जो धरती और उसके विभिन्न घटकों जैसे वायुमंडल महासागर भौगोलिक क्षेत्र और उनमें शामिल जीवमंडल आदि की छानबीन करता है पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के नाम से जाना जाता है। मंत्रालय का प्रयास पृथ्वी और उसके विभिन्न घटकों के बीच एक वांछित तालमेल बनाना है ताकि ऐसी प्रभावी सेवाएं प्रदान की जा सकें जिससे मानव जाति और पृथ्वी में मौजूद अन्य जीवन के नुक़सान को कम किया जा सके ध्रुवीय क्षेत्रों और समुद्र में मौजूद जीवों और गैर-जीवित संसाधनों की खोज और अन्वेषण की जा सके और मौसम जलवायु महासागर और भूकंपीय सेवाओं को देश के नागरिकों तक जल्दी से जल्दी पहुंचाया जा सके।

भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में मंत्री डाक्टर हर्षवर्धन मानते हैं कि भारत विज्ञान के सुपर पावर के रूप में उभर रहा है और इसके चलते पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय समूचे एशिया-प्रशांत क्षेत्र में नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए तैयार है। इससे न केवल हम पारस्परिक संबंधों का विस्तार कर सकेंगे बल्कि अपने पड़ौसी देशों को मौसम और इससे संबंधित संवाएं प्रदान कर सकेंगे।

मौसम जलवायु और सागर संबंधित बेहतर और सटीक भविष्यवाणी भूकंप की निगरानी और इससे संबंधित दूसरी सेवाओं की मांग निरंतर बढ़ रही है और पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय इन क्षेत्रों में नयी तकनीक और शोध को निरंतर बढ़ाने में लगा है।

साथ ही अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में इन भविष्यवाणियों और शोधों की मांग बढ़ती जा रही है। महासागरीय तापीय ऊर्जा पैदा करना समुद्र के संसाधनों का अन्वेषण और ध्रुवीय क्षेत्रों की तलाश वे अन्य क्षेत्र हैं जिन पर हम फोकस कर सकते हैं।

इसमें शक नहीं कि हमारी उपलब्धियां बहुत सी हैं और बढ़ती ही जा रही हैं जैसे जैसे भारत वैश्विक शक्ति बनने और तकनीक के क्षेत्र में श्रेष्ठता प्राप्त करने में निरंतर आगे बढ़ रहा है। यही कारण है कि डाक्टर एम राजीवन जो मंत्रालय में सचिव हैं अति उत्साहित हैं। गत दो तीन वर्ष पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के लिए विशेष रूप से उत्साहवर्धक रहे हैं जिनमें तकनीकी सेवाओं में महत्वपूर्ण उपलब्धियों के कारण मौसम जलवायु महासागर और भूकंप संबंधी सेवाओं में ग़ौरतलब बेहतरी हुई है।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के कार्यक्षेत्र का उल्लेख करते हुए डा राजीवन कहते हैं हमारे राष्ट्रीय एजेंडा में निरंतर खोज को बढ़ावा देना एक मुख्य उद्देश्य है ताकि धरती प्रणालियों पर नया परिप्रेक्ष्य प्रदान करें पृथ्वी और उसकी प्रक्रियाओं की बेहतर समझबनाएं ताकि धरती और उसके प्राकृतिक संसाधनों से हम अधिकाधिक लाभांवित हो सकें और तकनीकी प्रगति एवं शोध से अर्जित ज्ञान को सामाजिक लाभ और संवाओं को बेहतर बनाने हेतु लागू कर सकें। मंत्रालय की नीतियों कार्यक्रमों और परियोजनाओं को मिशन मोड में मंत्रालय से जुड़ी विभिन्न संस्थानों के माध्यम से कार्यान्वित किया जाता हैः जैसे भारत मौसम विज्ञान विभाग नेशनल सेंटर फार मिडिरेंज मौसम पूर्वानुमान भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान अंटार्कटिका और महासागर अनुसंधान के लिए राष्ट्रीय केंद्र नेशनल इंस्टीट्यूट आफ ओशन टेक्नोलाजी इंडियन नेशनल सेंटर फार ओशन इन्फार्मेशन सर्विसेज़ नेशनल सेंटर फार अर्थ साइंस स्टडीज़ नेशनल सेंटर फार सेस्मोलाजी समुद्रीय जीवित संसाधन और पारिस्थितिकी और एकीकृत तटवर्ती और समुद्री प्रबंधन के लिए केंद्र।

कहने की आवश्यकता नहीं है कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा चलाए जा रहे विभिन्न कार्यक्रम हमारे जीवन की गुणवत्ता के लिए पूर्ण रूप से प्रासंगिक हैं। हालिया अतीत में विभिन्न कार्यक्रमों के अंतर्गत कई मील के पत्थर पार किए गए हैं और भारत की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय द्वारा कई नई गतिविधियों को कार्यक्षेत्र के पोर्टफोलियो में जोड़ा गया है। इसके अलावा अनुसंधान और विकास में भारत के बढ़ते कदमों के फलस्वरूप शोध जानकारी और रिपोर्टिंग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धियां प्राप्त हुई हैं। गहरे समुद्र संसासधनों जीवित और गैर- जीवित के अन्वेषण को लक्षित करने संबद्ध प्रौद्योगिकियों के विकास और महासागर विज्ञान की गहन समझ प्राप्त करने का एक प्रमुख कार्यक्रम अब एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में प्रस्तावित किया गया है।

राष्ट्रीयमिशन में सभी वैज्ञानिक मंत्रालयों और राष्ट्रीय संस्थानों संगठनों की सक्रिय भागीदारी और सहयोग की परिकल्पना की गई है। प्रस्तावित गतिविधियों को तीन प्रमुख श्रेणियों के तहत वर्गीकृत किया गया है ब्लू इकोनामी समुद्र से धन अर्जित करना  डीप ओशन साइंस प्रौद्योगिकी विकास और क्षमता निमार्ण। गहरे महासागर अनुसंधान पर प्रस्तावित राष्ट्रीय मिशन जीवित और गैर-जीवित संसाधनों के माध्यम से न केवल अधिक आर्थिक लाभ लाएगा बल्कि युवा छात्रों को महासागर विज्ञान के चुनौतीपूर्ण और रोमांचक क्षेत्रों की ओर आकर्षित करेगा और बहुत सी नौकरियों और व्यवसाय के अवसर प्रदान करेगा।

मंत्रालय में वैज्ञानिक डा गोपाल अय्यंगर बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में मौसम और चक्रवात की भविष्यवाणी से संबंधित हमारे कौशल में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इस तथ्य को उष्णकटिबंधीय चक्रवात जैसे फैलिन हुदहुद और वर्धा और उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में चरम वर्षा वाली घटनाओं और आंध्र प्रदेश और गुजरात में बाढ़ संबंधित भविष्यवाणियों से स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है। गत तीन वर्षों में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के कारण इंसानी जीवन की हानि 100 से कम हो गई है जब्कि यही चक्रवात कुछ समय पहले तक हज़ारों जानें लिया करते थे। डा अय्यंगर बताते हैं अवलोकन में गुणवत्ता महत्वपूर्ण है ताकि मानिटर किया जा सके कि मौसम कैसे विकसित हो रहा है और यह भी आवश्यक है कि इस संदर्भ में बनाए गए गतिशील माडल को समय रहते इनपुट प्रदान किए जा सकें।

उच्च निष्पादन कंप्यूटिंग संसाधनों के अधिग्रहण ने हमारे मौसम और चक्रवात की भविष्यवाणी क्षमता में सुधार किया है, जिसके चलते मौसम की भविष्यवाणी क्षमता में उल्लेखनीय बदलाव आए हैं। इंडियन इंस्टीट्यूट आफ ट्रौपिकल मिटियोरोलाजी पुणे के वैज्ञानिकों द्वारा एक अत्याधुनिक पृथ्वी प्रणाली माडल ईएसएमद्ध का विकास किया गया है ताकि भविष्य के क्षेत्रीय हाई रिज़ोलूशन जलवायु परिवर्तन परिदृश्यों का प्रभावी ढंग से आकलन किया जा सके। यह माडल भारत की ओर से पहला जलवायु माडल होगा जो छठी आईपीसीसी जलवायु परिवर्तन मूल्यांकन प्रक्रिया में भारतीय योगदान के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

विस्तृत जानकारी देते हुए डा अय्यंगर ने बताया कि कृषि से जुड़े क्षेत्रों में कार्यरत लोगों के लिए सटीक मौसम की भविष्यवाणी का भी बहुत महत्व है। मौसम भविष्यवाणी अब केवल बड़े किसानों के लिए महत्वपूर्ण नहीं रह गई है। मंत्रालय की ‘ग्रामीण कृषि मौसम सेवा के द्वारा अब लगभग 21. 6 मिलियन किसान एसएमएस द्वारा फसल विशिष्ट कृषि मौसम विज्ञान सलाह प्राप्त कर रहे हैं। यह पूर्वानुमान क्षेत्रीय भाषाओं में सप्ताह में 2 बार किसानों को भेजा जाता है जिसमें अधिकतम-न्यूनतम तापमान वर्षा हवा की दिशा हवा की गति और मिट्टी की नमी की जानकारी दी जाती है। मंत्रालय ने 2019 के अंत तक भारत के 660 ज़िलों में से प्रत्येक ज़िले में कृषि मौसमवाणी इकाई स्थापित करने की योजना बनाई है।

डा हर्षवर्धन बताते हैं कि हमने 400 करोड़ रूप्ये से राष्ट्रीय मानसून मिशन की शुरूआत की है ताकि ब्लाक स्तर तक सभी संबंधित लोगों को मानसून के पूर्वानुमान और मानसून की सटीक जानकारी प्रदान की जा सके। वह आगे बताते हैं कि उत्तर पूर्व के पहाड़ी इलाक़ों में उच्च सटीकता के साथ मौसम की जानकारी प्रदान के लिए हमने डिब्रूगढ़ असम में मोहनबाड़ी में और अगरतला त्रिपुरा में अत्याधुनिक डापलर मौसम रेडार स्थापित किए हैं। सभी संबंधित क्षेत्रों में मंत्रालय अब विश्वसनीय एवं डाइनमिक भविष्यवाणियां प्रदान करने में निपुण हो गया है जिनकी लघु से मध्यम अवधि 10 दिन तक विस्तारित सीमा 20 दिन तक और एक मौसम तक भी रहती है। अब गर्मी के तापमान लू की हवाओं और सर्दियों में कोहरे का सटीक पूर्वानुमान भी मुमकिन है और साथ ही वायु की गुणवत्ता की निगरानी करना भी संभव है।

देश ने भूकंप की निगरानी में नेशनल सेंटर फार सेस्मोलाजी की स्थापना के माध्यम से उल्लेखनीय प्रगति की है। रियल टाइम भूकंपीय निगरानी नेटवर्क बनाया गया है जिसमें 82 फील्ड आबज़रवेशन सहित एनसीआर दिल्ली और पूर्वोत्तर में दो टेलीमेट्रिक क्लस्टर शामिल हैं ताकि कम से कम समय में भूकंप मापदंडों का अनुमान लगाया जा सके। भारतीय और वैश्विक भूकंपी स्टेशनों को कान्फिगर किया गया है ताकि भूकंप की जानकारी आटोमैटिक तौर पर तैयार करके 15 मिनट के भीतर पहली सूचना भेजी जा सके। भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधियों की रियल टाइम मानिटरिंग और रिपोर्टिंग के लिए एक 2 -स्टेशन वीसेट-आधारित भूकम्पीय टेलीमेट्री नेटवर्क को भी स्थापित किया गया है।

यह भी सुविधाएं देने की तैयारी की गई हैं कि भूकंपीय एनालाग चार्ट की इलेक्ट्रानिक फार्म में स्कैनिंग वेक्टर डिजिटलीकरण और व्यवस्थित ढंग से अभिलेखीयकरण किया जा सके जिसका बड़ा ऐतिहासिक महत्व है। मंत्रालय ने भारत के विभिन्न भूकंप प्रवण शहरों के माइक्रोजोनेशन का काम भी शुरू किया है जिसके चलते गुवाहाटी सिक्किम और बेंगलुरू का माइक्रोजोनेशन 1ः25,000 के पैमाने पर दिल्ली का 1ः50,000 पैमाने पर पूरा हो गया है। आपदा शमन और प्रबंधन शहरी विकास योजनाकरण डिज़ाइन और निमार्णकार्य जीवन और संपत्ति के लिए जोखिम मूल्यांकन रक्षा प्रतिष्ठानों भारी उद्योग सार्वजनिक उपयोगिताओं और सेवाओं आदि में इन प्रयासों का बड़ा महत्व है। इसी प्रकार पृथ्वी के बारे में अधिक जानकारी एकृत करने हेतु कराड महाराष्ट्र के कोयना भूकंपी क्षेत्र में डीप ड्रिलिंग का कार्य प्रारंभ किया गया है जो चट्टानों के प्रकार तरल दबाव हाइड्रोलाजिकल मापदंड तापमान और अन्य कई मापदंडों पर शोध करने में लाभकारी सिद्ध होगा तथा भूकंप के पहले भूकंप के दौरान और उसके बाद आसपास के क्षेत्र में गड़बड़ी को मापने का काम करेगा।

अब तक 6 कोर की ड्रिलिंग हो चुकी है जो लागिंग और गर्मी प्रवाह का माप करती है। यह अवलोकन जलाशय प्रेरित भूकंप की भौतिक प्रक्रियाओं को समझने में मदद करेगा।

इसके कारणों को विस्तारपूर्वक बताते हुए डा हर्षवर्धन कहते हैं कि अवलोकन नेटवर्क कम्पूटिंग संसाधनों को बढ़ाने और माडलिंग में शोध को बढ़ावा देने में उचित निवेश किए बिना यह सब संभव नहीं हो सकता था। हमें इन बेहतर सेवाओं के प्रसार में आवश्यकतानुसार वृद्धि करते रहना होगी और आऊटरीच बढ़ाना होगी ताकि किसान और मछुआरे अधिकाधिक लाभान्वित हो सकें। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जीवन सबसे महत्वपूर्ण है। जीवन के महत्व को यदि समझना है तो पृथ्वी के महत्व को समझना होगा।

अज़ीज़ हैदर

(Article exclusively done for Outlook Magazine)

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