कोई भी चुनौती बड़ी नहीं है : हरीश रावत- मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड

क्या आप जानते हैं कि उत्तराखण्ड एक ऐसा राज्य है जहां गत वर्षों में प्रति व्यक्ति औसत आय बहुत तेज़ी से बढ़ी है और वर्तमान समय में राष्ट्रीय औसत से दोगुनी है देश के लिए गर्व का विषय है कि उत्तराखण्ड सबसे तेजी से बढ़ते राज्यों में से एक है।

उत्तराखण्ड की वार्षिक विकास दर 13 प्रतिशत के लगभग है। औद्योगिक विकास दर लगभग 16 प्रतिशत व सेवा क्षेत्र में विकास दर 12 प्रतिशत है। इसके बावजूद प्रदेश की वर्तमान हरीश रावत सरकार इस से संतुष्ट नहीं है। मुख्यमंत्री के दिशा निर्देशों और उच्च स्तर पर लिये गये फैसलों से साफ है कि गरीबी, बेरोज़गारी व पलायन से मुक्ति पाने के लिए उत्तराखण्ड को वर्ष 2019 तक अठारह प्रतिशत की विकास दर प्राप्त करनी आवश्यक है। इस लक्ष्य को पाने के लिए कृषि एवं समबद्ध क्षेत्र की विकास दर को आठ प्रतिशत और सर्विस सैक्टर की विकास दर को वर्ष 2019 तक बीस प्रतिशत पहुंचाने के लिए सरकार ने कमर कस ली है।

क्या ऐसा कर पाना सम्भव है जब्कि देश के अधिकतर दूसरे राज्य इससे आधी विकास दर पाने में असक्षम रहे हैं। क्या हरीश रावत के नेतृत्व में वर्तमान सरकार राज्य को प्रगति के पथ पर आगे और आगे ले जा पायेगी

इस महान लक्ष्य की प्राप्ति जब ही हो सकती है जब विकास सन्तुलित एवं समावेशी हो और प्रदेश का अंतिम आदमी भी विकास में शामिल हो। इसके लिये सब से पहले पलायन पर नियंत्रण करना होगा और सम्भावना हीन क्षेत्रों में रोज़गार की सम्भावनायें पैदा करने पर बल देना होगा। न सिर्फ यह बल्कि हर क्षेत्र में विकास कार्यों को गती देना होगी। तब ही स्वर्णिम उत्तराखण्ड बनाने की ओर हम अग्रसर हो सकेंगे। परन्तु यह आसान लक्ष्य नहीं है! मुख्यमंत्री भले ही ऐसा करने पर वचनबद्ध दिखाई पड़ें स्वभाविक प्रश्न उठता है कि क्या ऐसा हो पायेगा? इस में शक नहीं कि चुनौती बड़ी है और लक्ष्य भी बड़ा है और इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिये कुशल और सुदृढ़ नेतृत्व का होना अनिवार्य है।

मुख्यमंत्री हरीश रावत को लगता है कि यह सम्भव है और वह इस अद्वितीय लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पूरा जतन करने का मन बनाये हुए हैं। वह कहते हैं लक्ष्य ऊंचा है मार्ग दुरूह है मगर मुझे अपने लोगों की सामूहिक समझ व दृढ़ इच्छा शक्ति पर विश्वास है। यदि उत्तराखण्ड वर्ष 2013 की भयंकर आपदा से उबर कर उत्साहपूर्वक तेजी से आगे बढ़ सकता है तो हमारे लिये कोई भी चुनौती बड़ी नहीं है। राज्य को चाहिये राजनैतिक स्थिरता सामाजिक राजनैतिक सहिष्णुता एवं सहयोग का वातावण। हमें बीते दिनों की कटुताओं को भूलकर राज्य के कुछ सामूहिक हित के सवालों पर एकजुट होकर कार्य करना होगा।

प्रदेश सरकार का अब तक का रिपोर्टकार्ड देखें तो स्पष्ट दिखाई पड़ता है कि छोटे परन्तु मज़बूत कदमों से शुरूआत करते हुये अब प्रदेश सरकार दूरगामी महत्व की योजनाओं पर कार्य कर रही है जिसका प्रदेश के विकास पर प्रभाव पड़ना लाज़मी है। प्रदेश सरकार ने देश में सर्वाधिक प्रकार की कल्याण्कारी पेन्शन योजनायें चालू कर रखी हैं और निरन्तर पेन्शनों की राशि सीमा दायरा बढ़ाती जा रही है। जहां दो वर्ष पूर्व एक लाख चैरासी हज़ार पैन्शन दी जा रही थीं वहीं यह दायरा अब बढ़कर सात लाख तक पहुंच गया है जो एक बड़ी उब्लब्धी है। लक्ष्य वर्ष 2018 तक दस लाख लोगों को इस दायरे में लाने का है। प्रदेश सरकार दिव्यांगजनों के लिए दिव्यांग आयोग के गठन के साथ-साथ उनको देय पेन्शन राशि में अनुपातिक तौर पर पांच सौ रूप्ये तक तथा 75 वर्ष से ऊपर के पेन्शन लाभार्तियों की पेन्शन में पांच सौ रूप्ये की वृद्धि करने जा रही है।  जननी-शिशु मृत्युदर में कमी लाने के लिए राज्य ने कई प्रयास प्रारम्भ किये हैं। अन्नप्राशन एवं खिलती कलियां प्रोग्राम के माध्यम से राज्य कुपोषित एवं रूग्ण बच्चों के पालन व चिकित्सा में पूर्ण सहयोग कर रहा है। इस योजना की सफलता हेतु सरकारने सौ और आंगनबाड़ी केन्द्र इस वर्ष खोलने की घोषणा की है। यह भी घोषणा की है कि प्रत्येक आंगनबाड़ी केन्द्र में सामाजिक संगठनों के सहयोग से वाटर फिल्टर लगाये जायेंगे। अन्य महत्वपूर्ण घोषणा के अनुसार गर्भवति मां एवं दूध पिलाने वाली मां को सप्ताह में दो बार दूध भी दिया जायेगा। बीपीएल कार्ड धारक महिला को गर्भावस्था के दौरान मातृत्व अवकाश के समतुल्य दो हजार रूप्ये की विशेष सहायता दी जायेगी। सरकारी विभागों व सहकारी उपक्रमों में कार्यरत महिलाओं को 180 दिन का मातृत्व अवकाश दिया जायेगा। बेटी लक्ष्मी है  इस भावना को आगे बढ़ाने के उदद्श्य से हमारी कन्या -हमारा अभिमान गौरा देवी-कन्या धन योजना नन्दा देवी वैवाहिक सहायता योजना’गर्भवति महिला विशेष पौष्टिक आहार योजनायें ढ़तापूर्वक आगे बढ़ाई जा रही हैं।

गांव गांव में महिला उद्यमी तैयार करने के लिए मुख्यमंत्री महिला सत्त आजीविका योजना प्रारम्भ की गई है। महिला स्वयं सहायता समूहों व महिला मंगल दलों की विकास में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री महिला स्वयं सहायता समूह सशक्तीकरण योजना’ प्रारम्भ करते हुए इस वर्ष अनुमानतः 12 हजार से अधिक महिला स्वयं सहायता समूह लाभान्वित होंगे। प्रत्येक महिला स्वयं सहायता समूह का बैंक में पांच हजार से खाता खोला जाएगा तथा व्यवसाय हेतु प्रत्येक समूह को 25 हजार रूप्ये तक सहायता स्वरूप उपलब्ध करवाये जायेंगे।

हरीश रावत सरकार द्वारा लिये गये महत्वपूर्ण फैसलों में एक यह भी है कि इन समूहों को उनके वार्षिक टर्न-ओवर पर 5 प्रतिशत का बोनस दिया जाएगा। महिला उद्यमियों व महिला स्वयं सहायता समूह के लिए उद्यमिता-हाट बनाये जा रहे हैं। सिंडकुल में दो सौ एकड़ भूमि में महिला उद्यमिता पार्क स्थापित किये जायेंगे ऐसा एक पार्क 10 एकड़ भूमि के साथ सितारगंज में स्थापित किया जा चुका है। नई दिशा योजना के नाम से हैण्डीक्राफट व हैण्डलूम के दस महिला कलस्टर विकसित किये जा रहे हैं। इन कलस्टरों में चयनीत महिलाओं को नन्दा देवी सेन्टर आफ एक्सीलेन्स फार हैण्डलूम एवं नैचुरल फाईवर में प्रशिक्षण दिया जायेगा। महिला स्वयं सहायता समूह यदि खेती के लिये लीज पर भूमि लेते हैं तो राज्य सरकार उन्हें खेती के लिये एक लाख रूप्ये की सहायता उप्लब्ध करवायेगी। खेती में कार्यरत महिला को मनरेगा मजदूर मानकर पारिश्रमिक उपलब्ध करवाया जायेगा। राज्य में दो हजार क्राफटस वूमैन प्रशिक्षित की जा रही हैं। विधवा महिलाओं को गाय गंगा योजना से लाभान्वित किया जा रहा है। पुलिस व अन्य सेवाओं में महिलाओं की भर्ति बढ़ाने के सत्त प्रयास जारी हैं। आंगनबाड़ी आशायें भोजन-माताओं को  राज्य सरकार ने लगातार कुछ न कुछ योजनायें देकर लाभान्वित किया है। इस क्रम को आगे बढ़ाते हुए अतिशीघ्र आशाओं को एक निश्चित मानदेय देने का निर्णय लिया गया है तथा शिक्षा प्रेरकों के मानदेय में एक हजार रूप्ये की वृद्धि करने का फैसला लिया गया है। भोजन माताओं को प्रतिवर्ष एक हज़ार रूप्या वर्दी खरीदने के लिए दिया जायेगा।

उत्तराखण्ड में प्राथमिक विद्यालयों से लेकर स्नाकोत्तर कालेजों एवं वोकेशन संस्थानों में अध्यापकों व प्रधानाचार्यों की उपलब्धता में संतोषजनक सुधार आया है। इसी दौरान एल टी शिक्षकों प्रवक्ताओं व प्राईमरी शिक्षकों के साढ़े ग्यारह हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां हो चुकी हैं या गतिमान हैं। लगभग छः हजार अतिथि शिक्षक भी शीघ्र विद्यालयों को उपलब्ध होंगे। पांच सौ से अधिक माडल स्कूल विकसित किये जा रहे हैं। चार राजीव गांधी अभिनव विद्यालय प्रारम्भ कर दिये गये हैं। 750 स्कूलों में स्पोकन इंग्लिश का शिक्षण उन्नति कार्यक्रम के तहत प्रारम्भ कर दिया गया है। स्कूलों में प्रत्येक स्तर पर लर्निंग लेवल एसस्मेन्ट एवं मूल्यांकन की व्यवस्था लागू की गई है। मानव शक्ति संर्वधन हेतु तकनीकी शिक्षा के ढांचे का उपयोग स्थानीय आवश्यकतानुसार एवं बाजार की मांग के अनुरूप हो इस हेतु साफट स्क्लि की शिक्षा के कोर्सेज आयोजित किए जा रहे हैं। इस दिशा में निसबड़ सहित कुछ संस्थाओं के साथ सहभागिता पर कार्य किया जा रहा है। पांच वर्ष में पांच लाख उत्तराखण्डियों कोतकनीकी प्रशिक्षण से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इस हेतु राज्य की स्किल मैपिंग की गई है। अल्पसंख्यकों में इस योजना के प्रसार के लिए हुनर का कार्यक्रम गतिमान है। स्टार्टअप योजना के साथ सम्बद्ध होते हुये राज्य द्वारा दस करोड़ रूप्ये का कारपस गठित कर युवाओं महिलाओं शिल्पियों व घुमंतू वर्गों के लिये मिनी स्टार्टअप प्रोग्राम संगठित किये जा रहे हैं। इसका उद्देश्य पचास हजार युवाओं को नौकरी मांगने के बजाय लघु उद्यमी में बदलने का है। सिडकुल के सहयोग से राज्य के पर्वतीय अंचल में 6 लघु उद्यम संस्थान बनाये जा रहे हैं जिनमें से दो लगभग तैयार हो चुके हैं। प्राकृतिक रेशों के सम्बर्द्धन व कोमल काष्ठ के उत्पादन व उपयोग की व्यापक योजना प्रारम्भ की जा चुकी है। उद्योग के क्षेत्र में प्रत्येक श्रेणी में उद्योगों जिनमें इलैक्ट्रोनिक्स टैक्सटाइल्स फिल्म खाद्य प्रसंस्करण भी सम्मलित हैं नीतियां नियम उप नियम बनाये जा चुके हैं। यह सब प्रदेश की चैतरफा तरक्की के लिये आवश्यक हैं।

गत दिनों में तीन करोड़ के लगभग कावड़ियों के साथ कावड़ मेला सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ है। यह राज्य सरकार की बड़ी उप्लब्धि के रूप में देखा जा रहा है। हेमकुण्ड सहित पांच धाम यात्रा में 12 लाख से अधिक यात्री श्री केदारनाथ बद्रीनाथ गंगोत्री यमनोत्री व हेमकुण्ड की यात्रा पर आ चुके हैं। इस सब से देश भर में सुरक्षित-सुगम उत्तराखण्ड यात्रा का संदेश गया है जिससे आने वाले वर्षों में पर्यटन में वृद्धि होने में सहायता मिलेगी।

पर्यटन क्षेत्र में राज्य सरकार की कोशिशें अद्वितीय रही हैं और आशा की जा रही है कि इनसे प्रदेश में पर्यटन को बढ़ाने में मदद मिलेगी। पृथक ईको टूरिज्म कारपोरेशन के गठन के साथ हरीश रावत सरकार ने प्रदेश के जंगलों-बुग्यालों, ट्रेकिंग मार्गों व साहसिक खेल गन्तव्यों के विकास की ओर ध्यान दिया है। बर्डस बटरफलाईज और रैपटाईल्स तथा बुरांश लवर्स के लिये नये पार्कस चिन्हित कर विकसिक किये जा रहे हैं। राफटिंग सहित सभी प्रकार के वाटर स्पोर्टस पैरागलाईडिंग-एरोस्पोर्टस स्किईंग माउन्ट बाईकिंग ट्रेकिंग फोरेस्ट साईकिलिंग के प्रेमियों के लिए कई नये डेस्टिनेशन चिन्हित कर विकसित किये गये हैं। राज्य अपने लघु व मध्य दर्जे के टूरिस्ट सर्किट भी विकसित कर रहा है। सांस्कृतिक धरोहरों जैसे वाद्ययंत्रों उत्तराखण्डी शैली युक्त भवनों सांस्कृतिक मेलों-त्योहारों को प्राकृतिक सौन्दर्य व साहसिक पर्यटन के साथ जोड़कर पर्यटन के इन्टिग्रेटेड रोड मैप पर अमल हो रहा है। एक हजार पर्वतीय शैली के घरों को होमस्टे के कनसेप्ट  पर पर्यटकों को उपलब्ध करवाया जा रहा है। ऋषिकेश व जागेश्वर के योगा सर्किट में योग और प्रकृति के सामनजस्य से योग आधारित पर्यटन को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसके अतिरिक्त तीर्थ और पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गये हैं जो प्रदेश के बहुआयामी विकास में बहुत महत्वपूर्ण साबित होंगे।

चिकित्सा आर्युवेदिक नर्सिंग और तकनीकी शिक्षा के क्षेत्र में राज्य बहुत अच्छी स्थिति में है। इस क्षेत्र में गुणत्मक सुधार हेतु दृढ़ प्रयास किये जा रहे हैं। पन्तनगर कृषि विद्यालय पुनः अपने पुराने गौरव को प्राप्त कर रहा है। सरकार ने दो महत्वकांक्षी योजनायें लागू की हैं। पहली खाद्य सुरक्षा योजना जिसके तहत सरकार ए पी एल कार्ड धारकों को भी सस्ता अनाज मुहैय्या कराने में लगभग 300 करोड़ रूप्या अतिरिक्त खर्च करेगी। दूसरी योजना ‘मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा’ योजना है जिसका इस वर्ष दायरा बढ़ाकर एक लाख पिछत्तर हज़ार रूप्या कर दिया गया है।

सरकार इस वर्ष चार डाईलेसीस सेन्टर भी स्थापित करने जा रही है। दूर-दराज़ के क्षेत्रों में सर्जिकल एवं डायग्नोस्टिक कैम्पस व मेडिकल वैन सर्विस के माध्यम से सरकार यथासम्भव स्वास्थ्य सेवायें पहुंचाने का प्रयास कर रही है। इस व्यवस्था के साथ हैली सर्विसेज़ को जोड़ने का भी प्रावधान रखा गया है। स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव की समस्या को दूर करने हेतु सरकार लगभग पिछत्तर नये एएनएम सेन्टर भी खोलने जा रही है तथा दाई सेवाओं को सुधारने का प्रयास किया जा रहा है।

केवल यह ही नहीं उपलब्धियां गिनाने को अभी बहुत कुछ है सन्तुलित एवं समावेशी विकास प्रदेश की पहचान बने इस दिशा में हरीश रावत सरकार ने कई ठोस पहलें की हैं। समय बतायेगा कि गत दिनों की आपदा और मार्ग में आयी राजनीतिक बाधाओं से निकल आने के बाद क्या प्रदेश विकास और तरक्की की असीमित गति को प्राप्त कर पायेगा और मुख्य मंत्री हरीश रावत का प्रदेश को नई ऊंचाईयों तक पहुंचाने का स्वपन पूरा हो पायेगा

मुख्य मंत्री कहते हैं उत्तराखण्ड के पास प्रतिभा व सामथ्र्य की कमी नहीं है। अपनी छोटी-बड़ी पहलों के माध्यम से हम अपने साधनहीन लोगों व अभावग्रस्त क्षेत्रों को एक बेहतर जीनव दे सकते हैं। यही राज्य निमार्ण का हमारा लक्ष्य है।

Aziz Haider

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