अखिलेश – नाम एक दूरदर्शी नेतृत्व का – उत्तर प्रदेश को देश के दूसरे राज्यों से आगे ले जाने हेतु अखिलेश यादव के दूरगामी क़दम

उत्तर प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री के गत दिनों लिए गये निर्णयों से यह तकरीबन निश्चित हो चुका है कि भारत का यह सर्वाधिक जनसंख्या वाला राज्य सभी पुराने मापदंडों को पीछे छोड़ते हुए देश के अन्य राज्यों से आगे निकलने की तैयारी में है। चार वर्ष के अपने कार्यकाल में प्रदेश के इस सब से युवा मुख्यमंत्री ने साबित कर दिया है कि वह एक दूरदर्शी राजनीतिज्ञ हैं। उनके द्वारा उठाए गए कदम न केवल राज्य के व्यापक विकास और इसकी 20 करोड़ जनसंख्या के लिए हितकारी हैं बल्कि सुनिश्चित करते हैं कि सभी क्षेत्रों और समाज के तमाम वर्गों का सार्थक विकास हो।

अखिलेश यादव के अन्दर के टेक्नोक्रेट की झलक उनके विचारों की प्रगाढ़ता में दिखाई पड़ती है जिसको वह बड़ी कुशलता से राज्य के सुधार के लिए बनाई जा रही योजनाओं में अनुवादित करते हैं। मार्च 2012 के उस पहले रोज़ से जब उन्होंने मुख्यमंत्री का प्रतिष्ठित पद संभाला उनकी दूरदर्शी निगाहें उत्तर प्रदेश को फास्टट्रैक पर ले जाने पर लगी थीं। उनका पहला दूरगामी कदम प्रदेश के युवाओं को कंप्यूटर शिक्षा से जोड़ना था। ज़मीन से जुड़े नेता और अपने पिता मुलायम सिंह यादव की भांति वह भी अच्छी तरह जानते थे कि छात्रों के हाथों में लैपटाप सौंपे बिना कंप्यूटर साक्षरता संभव नही। अपने चुनावी घोषणा पत्र में पहले ही मुफत लैपटाप बांटने का वादा कर चुके अखिलेश यादव नई सरकार संभालने के तुरंत बाद ही 15 लाख स्कूली छात्र और छात्राओं को लैपटाप वितरण करने के महत्वपूर्ण कार्य में लग गए। उनके इस महत्वपूर्ण कदम का बाद में कई दूसरे राज्यों ने अनुसरण किया।

उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ को आईटी हब बनाने के कार्य को भी गति प्रदान की है जिसको लखनऊ के बाहरी इलाक़े में नए लखनऊ के रूप में विकसित किया जा रहा है। ऐसी परियोजना की परिकल्पना अखिलेश यादव से पहले कोई भी मुख्यमंत्री नहीं कर सका था बावजूद इसके कि यह तथ्य किसी से छिपा नहीं है कि राज्य से सब से अधिक आईटी कर्मी आते हैं जो सात समुंद्र पार भी अपने काम के दम पर देश के लिए ख्याति अर्जित करने में लगे हैं। कंप्यूटर और आईटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एचसीएल ने जो पहले से ही नोएडा में गहरे पांव जमाए हैइस आईटी हब में अपना कार्यालय स्थापित करने की इच्छा दिखाई है।

कुछ समय पूर्व आईटी शहर में आयोजित एक समारोह में एचसीएल के चेयरमैन शिव नादर ने मुख्यमंत्री की उपस्थिति में दिए गए अपने भाषण में क्हा था कि वह वैश्विक आईटी मानचित्र पर उत्तर प्रदेश का नाम डालने का भरपूर प्रयास करेंगे। इस घोषणा के चलते एचसीएल के 150 इंजीनियरों की पहली खेप आईटी हब में प्रशिक्षण प्राप्त करने में लगी है।अगले कुछ महिनों में इस आईटी शहर के शुरू होने पर यह पहली खेप कार्य करना प्रारंभ करेगी।

विकास के पहियों को गति देने के संकल्प को सुनिश्चित करने हेतु मुख्यमंत्री ने राज्य की 1000 किलोमीटर की लंबाई में एक्सप्रेस-वे बनाने की निर्माण योजना की कल्पना की जो अपनी तरह की देश में सबसे बड़ी योजना है। इस प्रकार आगरा और लखनऊ के बीच 301 किलोमीटर की लंबाई में 6 लेन एक्सप्रेस-वे बनाने का काम जो पहले से प्रगतिशील था उसको बिहार की सीमा पर स्थित बलिया से जोड़ दिया गया है। चूंकि आगरा पहले से ही 6 लेन के यमुना एक्सप्रेस-वे के माध्यम से नोएडा से जुड़ा हुआ है, इस योजना के तहत राज्य का पूर्वी भाग अपने आप ही देश की राजधानी दिल्ली से फास्ट ट्रैक पर जुड़ जाएगा।

इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री यह भी सुनिश्चित करने में लगे हैं कि राज्य की राजधानी और प्रदेश के 75 ज़िला मुख्यालयों के बीच त्वरित कनेक्टिविटी प्रदान की जाए। इस वर्ष के अंत से पहले इन 4 लेन राजमार्गों को पूरा करने हेतु काम तेज़ी से चल रहा है।

अन्य कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं भी चालू हैं जो इस वर्ष के अंत तक पूरी हो जाएंगी। मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से इन परियोजनाओं पर नज़र रख रहे हैं। इन परियोजनाओं में लखनऊ मैट्रो सम्मिलित है जिस पर बड़ी तीव्र गति से कार्य चालू है जो अपने आप में अद्वितीय है।

लखनऊ मैट्रो रेल कारपोरेशन लिमिटेड के गठन के साथ ही 27 सितंबर 2014 को पहले चरण का कार्य शुरू हुआ। 12500 करोड़ लागत की यह मैट्रो परियोजना प्रदेश की अब तक की सब से महंगी सार्वजनिक परिवहन परियोजना होगी। युवा मुख्यमंत्री ने इस जन परिवहन प्रणाली परियोजना को शुरू करने का फैसला इसलिए लिया ताकि तेज यातायात सुनिश्चित किया जा सके और लखनऊ की सड़को पर यातायात की भीड़ पर काबू पाया जा सके। इस मैट्रो रेल नैटवर्क में दो गलियारे होंगे उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम। एक मार्ग अमौसी को मुंशी पुलिया से जोड़ेगा और दूसरा मार्ग वसंत कुंड को चारबाग रेलवे स्टेशन से जोड़ेगा। दोनो लाइनें चारबाग़ में मिलेंगी। चारबाग़ और अमौसी हवाई अड्डे के बीच 8 किलो मीटर लंबे रेलमार्ग का पहले चरण जनवरी 2017 तक चालू होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री को भरोसा है कि वह अगले कुछ महीनों में चार अन्य शहरों में इसी प्रकार की मैट्रो परियोजनाओं को हरी झंडी दिखा पाएंगे।

खेलकूद में रूचि रखने वाले युवा मुख्यमंत्री चाहते थे कि प्रदेश में एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम बने। इस पर बड़ी तेज़ी से कार्य चल रहा है और शीघ्र पूरा होने की उम्मीद है। मैदान को स्थानीय मैचों के लिए खोला जा चुका है और स्टेडियम बनाने का काम जारी है। इस के समीप ही एक विश्व स्तरीय फुटबाल स्टेडियम बनाया जा रहा है। काम पूरा होने पर दोनों स्टेडियम मेंअंतरराष्ट्रीय कोचों द्वारा क्रिकेट और फुटबाल अकादमी चलाने की योजना है।

समाज में स्वास्थ्य के महत्व को समझते हए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ऐतिहासिक कदम उठाते हुए लखनऊमें न केवल एक भव्य अस्पताल स्थापित करने के लिए देश के अग्रणी मेदांता समूह को लाने का निर्णय लिया है बल्कि लखनऊमें एक अत्याधुनिक कैंसर केंद्र के निर्माण का कार्य शुरू किया है।

इस बीच गरीबों के इलाज को न केवल मुफत घोषित किया गया है बल्कि वास्तव में राज्य के मेडिकल कालेजों और राज्य के विभिन्न शहरों में मौजूद उन्नत रेफरल केन्द्रों सहित सभी सरकारी अस्पतालों में मुफत इलाज कराया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के आम आदमी के लिए एंबुलेंस सेवा वरदान से कम नहीं है। राज्य के हर कोने में एंबुलेंस सेवा केवल एक फोन पर उपलब्ध है। राज्य के किसी भी कोने में 102 या 108 फोन पर डायल करने पर 20 से 30 मिनट के अन्दर एम्बुलेंस का पहुंचना सुनिश्चित किया गया है।

इनमें से 102 एंबुलेंस सेवा विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं के उपचार और प्रसव संबंधी इलाज के लिए समर्पित है। गौरतलब है कि इस के द्वारा प्रदेश में मातृ मृत्यु दर और नवजात शिशु मृत्यु दर नीचे लाने में बहुत सहायता मिली है।

तमाम जनमानस के लिए चिकित्सा उपचार आसान करने के अतिरिक्त अखिलेश यादव ने पद ग्रहण करने के बाद के चार वर्षों में प्रदेश के मेडिकल कालेजों में एमबीबीएस की सीटें 1140 से बढ़ा कर 1750 कर दी हैं। इन सीटों की संख्या 3000 करने के लक्ष्य के साथ सरकार ने जौनपुर, फिरोज़ाबाद, चंदौली, शाहजहांपुर, नजीबाबाद और बहराइच सहित विभिन्न शहरों में 11 नए मेडिकल कालेजों का उद्घाटन किया है जिनका अगले दो वर्षों में परिचालन हो जाएगा।

अगले चार वर्षों में राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई विभिन्न योजनाओं में किसानों, छात्रों, महिलाओं और लड़कियों की ज़रूरतों पर केंद्रित कई योजनाएं हैं। इन योजनाओं ने प्रदेश के कोने कोने में आशा और खुशी की लहर को संचालित किया है। युवा मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता ही थी कि उन्होंने प्रदेश में डेयरी विकास को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने का फैसला लिया। इस क्षेत्र में निवेश का रास्ता साफ करने की कोशिशों ने रंग दिखाया और डेयरी क्षेत्र की एक विशाल कंपनी ने कन्नौज के उमरधा शहर में 140 करोड़ रूप्ये की लागत का दूध प्रसंस्करण संयत्र लगाने का फैसला लिया। एक दिन में एक लाख लीटर दूध प्रसंस्करण क्षमता के साथ यह अपनी तरह की पहली परियोजना होगी। इस संयंत्र के चालू हो जाने पर राज्य में दूध और उससे प्रसंस्कृत उत्पादो की उपलब्धता को बढ़ावा मिलेगा।

औद्योगिक विकास मुख्यमंत्री की प्राथमिकताओं की सूची में हमेशा ऊपर रहा है। उन्होंने राज्य में विभिन्न स्थानों पर एकीकृत औद्योगिक टाऊनशिप के विकास की योजनाओं की परिकल्पना की। जैसे औरैया में 204 करोड़ लागत से 300 एकड़ भूमि पर प्लास्टिक सिटी की योजना बनाई जिसमें 4000 करोड़ रूप्ये के निवेश की उम्मीद है। इस औद्यौगिक एवम सह आवासीय टाऊनशिप को कौशल विकास केंद्र, टूल रूम, ट्रीटमेंट संयत्र, कंटेनर डिपो, गोदाम आदि सुविधाओं से लैस किया जाएगा।

इसी प्रकार 1000 करोड़ रूप्ये के अनुमानित निवेश से कानपुर में एक मेगा लेदर क्लस्टर प्रस्तावित है। इस बेल्ट में छोटे और मध्यम क्षेत्र के उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने कुल भूमि का 50 प्रतिशत केवल मध्यम और छोटे उद्योगों के लिए निर्धारित करने का निर्णय लिया है। औद्योगिक अपशिष्ट के उपचार और वर्षा जल संचयन की सुविधाओं से लैस इस क्लस्टर में भण्डारण के लिए विशेष सुविधाएं, डिजाइन सेंटर और मानव संसाधन विकास केंद्र भी उपलब्ध होगा।

मुख्यमंत्री द्वारा शुरू की गई एक और मेगा औद्योगिक परियोजना गंगा पार परियोजना है। इस विशाल परियोजना को कानपुर के बाहरी इलाकें में गंगा नदी के साथ 1156 एकड़ क्षेत्र में शुरू किया जा रहा है। इस परियोजना में बड़े पैमाने पर निवेश हो रहा है। उम्मीद है कि इसमें 10000 करोड़ रूप्ये तक का निवेश संभव हो पाएगा। श्री अखिलेश यादव ने स्वयं इस परियोजना का उद्घाटन किया जो लखनऊ-कानपुर राजमार्ग पर लखनऊ हवाई अड्डे से मात्र 70 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पर्यावरणविद् मुख्यमंत्री ने पूरे क्षेत्र को ‘शून्य’ प्रवाह र्निवहन इकाइयों के लिए आरक्षित किया है।

एक अन्य उच्च तकनीक से लैस एकीकृत औद्योगिक टाऊनशिप योजना इलाहाबाद के करीब बनाई गई है जिसमें 1500 एकड़ क्षेत्र भूमि को प्रयोजन के लिए निर्धारित किया गया है। इस बेल्ट में लंबी अवधि के निवेश की अनुमानित राशी 10000 करोड़ रूप्ये है।

भारत का पहला अरोमा पार्क और इत्र संग्रहालय बनाने की नई योजना के साथ कन्नौज के पारंपरिक इत्र उद्योग को बढ़ावा मिलना सुनिश्चित है। इससे पारंपरिक इत्र निर्माताओं को न केवल अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर मिल पाएगा बल्कि उन्हें बाज़ार की आवश्यकताओं के मद्देनज़र अपने कौशल का उन्नयन करने के लिए एक विश्व स्तरीय मंच मिलेगा। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआईडीसी) द्वारा संचालित इस परियोजना द्वारा खुश्बू सेंटर के रूप में कन्नौज के पुराने गौरव को बहाल करने का इरादा है।

श्री अखिलेश यादव द्वारा शुरू की गई कई क्रंतिकारी योजनाओं में निःशुल्क ई-रिक्शा वितरण योजना भी है जिसको लखनऊकी परिवहन व्यवस्था को बदलने के लिए शुरू किया गया। लखनऊमें ई-रिक्शा ने बड़े पैमाने पर पारंपरिक चक्र-रिक्शा की जगह ले ली है।

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखण्ड क्षेत्र में सूखे की बारहमासी समस्या को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने सभी जिला मजिस्टेªटों को निर्देश दिए हैं कि वे सुनिश्चित करें कि क्षेत्र में भुखमरी से एक भी मौत न हो और इसको रोकने के लिए समय रहते कदम उठाए जाएं। पूरे क्षेत्र में प्रत्येक गरीब परिवार को 10 किलो आटा, 5 किलो चावल, 1 किलो शुद्ध घी, 5 लीटर सरसों का तेल, 1 किलो दूध पाउडर और 25 किलो आलू दिए जा रहे हैं। अप्रैल माह में व्यक्तिगत रूप से श्री अखिलेश यादव ने स्वयं महोबा के 1500 परिवारों को यह खाद्य पैकेट वितरित करके इस कार्य की शुरूआत की। कुल मिलाकर 867 करोड़ रूप्ये की राहत किसानों को दी गई है। सूखा प्रभावित लोगों की सहायता हेतु बुंदेलखण्ड के 7 जिलों झांसी, महोबा, चित्रकूट, ललितपुर, बांदा, हमीरपुर और जालौन में 666 गहरी बोरिंग वाले हैंड पंप लगाए जा रहे हैं।

सूखा प्रभावित क्षेत्र के लोगों को राहत देने के लिए और अधिक कदम उठाने हेतु मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री से 7 मई को व्यक्तिगत मुलाकात करके 11000 करोड़ रूप्ये के विशेष पैकेज की मांग की है और इस संबंध में एक विस्तृत योजना उनके समक्ष रखी है।

कानून और व्यवस्था के मोर्चे पर भी अखिलेश यादव सरकार ने आवश्यकता पड़ने पर पुलिस की तुरंत उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कुछ ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। संकट में घिरी महिलाओं को शीघ्र सहायता प्रदान के लिए 1090 की विशेष महिला हेल्पलाइन प्रारंभ की गई है तथा एक महिला सम्मान कोष महिलाओं के उत्पीड़न की शिकायतों का तत्काल पंजीकरण सुनिश्चित करने के लिए स्थापित किया गया है।

मुख्यमंत्री की ई-गवर्नेंस योजना भी अब जमीन पर आकार लेती जा रही है। इस योजना के तहत भू-राजस्व रिकार्ड एक माऊस के क्लिक पर सभी के लिए उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इससे गरीब अनपढ़ किसान की राजस्व विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों पर निर्भरता कम होगी जो कि सदियों से चली आ रही है।

Aziz Haider

(Article Exclusively done for Outlook Magazine)

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