शिवपाल यादव इस्रायल की यात्रा पर रवाना

मुस्लिम  संस्थाओं का समाजवादी पार्टी से अमरीका और इस्रायल से बढ़ती दोस्ती पर अपना रूख साफ करने की अपील

आर एन आई, लख्नऊः

अमरीका, इस्रायल और ब्रिटेन ने भारत की अंदरूनी सियासत में दख्लअंदाजी करने के लिए नई रणनीति निर्धारित की है। ये नई रणनीति अपनी मांगे और कार्यसूचि मंवाने के लिए केन्द्र में सत्तारूढ़ पार्टी की ओर देखने की जगह स्थानीय पार्टियों से दोस्ती बढ़ा कर केन्द्र में सत्तारूढ़ पार्टी पर दबाव बना कर अपने एजेंडे की पूर्ती कराना है। लख्नऊ की सियासत अभी ब्रिटेन और अमरीका के भारत में राजदूतों के आगमन से उबर भी नहीं पाई थी कि आज समाजवादी पार्टी के मुख्य नेता और मुलायम सिंह यादव के भ्राता शिवपाल यादव की इस्रायल की रवांगी की खबर ने न केवल राजनैतिक और सामाजिक हल्कों में बदलते संबंधों को लेकर चर्चा का बाजार गरम कर दिया बल्कि एक तब्के में मुख्यतः मुसलमानों में बेचैनी को और अधिक बढ़ा दिया।

आर एन आई को मिली जानकारी के अनुसार शिवपाल यादव बुनदेलखंड में सिंचाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के लक्ष्य की पूर्ती के लिए जानकारी प्राप्त करने इस्रायल की यात्रा पर गए हैं। अभी एक ही रोज पहले ब्रिटेन के राजदूत लख्नऊ आकर मुस्लिम नेता खालिद रशीद फिरंगीमहली से मुलाकात कर चुके हैं जिसके पश्चात वह एम बी कलब में अम्मार रिजवी द्वारा दिए गए रात्री भोज में भी उपस्थित हुए। चार दिन पूर्व अमरीका के भारत में राजदूत ने भी लख्नऊ का रूख किया था और मुख्य मंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की थी। उनके आगमन पर भी अम्मार रिजवी ने एम बी कलब में रात्री भोज का आयोजन किया था जिसमें लख्नऊ के राजनैतिक, सामाजिक और शैक्षिक जगत के करीब 150 व्यक्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मौलाना खालिद रशीद फिरंगीमहली इस भोज में भी आमंत्रित थे। करीब दो माह पूर्व बिल गेट्स भी लख्नऊ आकर अखिलेश यादव से मुलाकात कर आगे वाली मुलाकातों के लिए जमीन समतल कर चुके हैं।

मुसलमानों के मध्य इन बदलते समीकरणों को लेकर बेचैनी है। प्रदेश में मुसलमान समाजवादी पार्टी के साथ बड़े लंबे समय से जुड़ा रहा है और इस पार्टी के साथ अपनी सुरक्षा और दूसरे हितों को जोड़ कर देखता है। परन्तु ब्रिटेन, अमरीका और इस्रायल का एजेंडा मुसलमानों के खिलाफ होने के कारण उत्तर प्रदेश के मुसलमान समझ नहीं पा रहे कि अमरीका और इस्रायल से बदलती दोस्ती के पीछे क्या राज है।

आर एन आई से बातचीत करते हुए असर फाउंडेशन के अध्यक्ष शौकत भारती ने अमरीका और इस्रायल से समाजवादी पार्टी की बढ़ती नजदीकी पर गहन चिंता जताई। उन्होंने क्हा कि मुसलमानों ने समाजवादी पार्टी का साथ उसकी पालिसी के तहत दिया था न कि किसी व्यक्ति विशेष से प्रेम के कारण। यदि समाजवादी पार्टी ने अमरीका और इस्रायल के एजेंडे के साथ चलने की चेष्टा की तो मुसलमान उससे अपने को अलग कर लेंगे। उन्होंने क्हा कि यह विदेशी ताकतें अपने ‘डिवाईड एंड रूल’ अर्थात बांटो और राज करो के फार्मूले पर चलते हुए देश की जनता को बांटने का काम कर रही हैं जो कि भारत के खिलाफ साजिश है।

हालांकि सब लोग अमरीका, ब्रिटेन आदि की स्थानीय पार्टियों से बढ़ती नजदीकियों को इस दृष्टिकोण से नहीं देख रहे। अपना नाम न बताने की शर्त पर लख्नऊ के एक सामाजिक कार्यकत्र्ता ने बताया कि इस का असली कारण भारत में एफ डी आई और रिटेल की अनुमति प्राप्त करना है और इसकी आड़ में यह विदेशी ताकतें अपने अन्य स्वार्थ की पूर्ती भी कर सकती हैं जो इस समय ईरान और सीरिया की सरकारों को गिराना है।

यहां यह उल्लेख करना आवश्यक है कि पिछले दिनों मे अमरीका ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से  भी अपनी मित्रता बढ़ाई है जिस के फलस्वरूप आज पश्चिमी बंगाल में कई अमरीकी कंपनियों ने अपने कारोबारी ठिकाने बना लिए हैं। हिलेरी क्लिंटन भारत में आईं तो पहले कल्कत्ते का रूख करके उन्होंने केन्द्रीय सरकार को पैगाम दे दिया कि वह उनका विरोध करके या उनके एजेंडे के विपरीत जाकर चैन से न बैठे। शायद उत्तर प्रदेश के माध्यम से भी यही पैगाम देना उद्देश्य है।

इन लोगों का मानना है कि उत्तर प्रदेश सरकार का इतना महत्वपूर्ण सदस्य केवल कोई छोटी सी जानकारी प्राप्त करने इस्रायल का रूख करे, यह बात अकल से परे है। समझा जा रहा है कि इसके पीछे बहुत ही महत्वपूर्ण उद्देश्य छिपे हैं। आर एन आई से सम्पर्क में कुछ संस्थाओं का कहना है कि वह शीघ्र ही इस मुद्दों को लेकर जनता के मध्य जाएंगी और समाजवादी पार्टी के लीडरों से मांग करेंगी कि वह अपना रूख साफ करे। आखिर क्यों शिवपाल यादव ने इस्रायल की यात्रा पर जाने से पहले जनता और खासकर अपने मुस्लिम वोटबैंक के जजबात की ओर ध्यान नहीं दिया?

आर एन आई न्यूज नेटवर्क

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