‘‘मुझे नहीं पता मैंने ऐसा क्या किया कि हमारे अपनों ने बुरा माना’’ः कमाल फारूकी

kamalfarooqi

समाजवादी पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सचिव पद से बर्खास्त किए जाने पर वरिष्ठ मुस्लिम समाजसेवी से खास बातचीत

आर एन आई, नई दिल्लीः

यासीन भटकल को आतंकवाद के आरोप में पुलिस द्वारा गिरफतार किए जाने पर एक टीवी चैनल को दिए गए ब्यान पर समाजवादी पार्टी के नेता और वरिष्ठ समाजसेवी कमाल फारूकी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सचिव पद से बर्खास्तगी एक बड़े विवाद का रूख लेती जा रही है। कई मुस्लिम संस्थाएं और विचारक इसे अल्पसंख्यक आवाज का गला घोंटने के एक और उदाहरण के रूप में देख रहे हैं। वहीं दूसरी ओर एक तबका ऐसा है जो समाजवादी के वरिष्ठ नेता प्रोफैसर राम गोपाल यादव द्वारा कमाल फारूकी को निष्कासित किए जाने को सही ठहरा रहे हैं। हमारे संवाददाता ने कमाल फारूकी से बात की और जानना चाहा कि आखिर उन्होंने ऐसा क्या क्हा कि गत दो वर्षों में दिल्ली में समाजवादी पार्टी का चेहरा बन कर सामने आए कमाल फारूकी को उनके पद से हटना पड़ा। क्या कह रहे हैं कमाल फारूकी और क्या है उनका रद्देअमल, पढि़ए हमारी खास रिपोर्ट।

पिछले 20 वर्ष से दिल्ली में अल्पसंख्यक समुदाय की आवाज बन गए कमाल फारूकी का कहना है कि वह हमेशा अल्पसंख्यक वर्ग और राष्ट्रीय हित की बात करते आए हैं। यासीन भटकल के पकड़े जाने पर उनके द्वारा दिया गया ब्यान एक चैनल विशेष ने तोड़ मरोड़ कर पेश किया जिसके फलस्वरूप यह बतंगड़ बन कर सामने आया। कमाल फारूकी अब तक समझ नहीं पा रहे हैं कि उन्होंने ऐसा क्या क्हा जो समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को बुरा लगा।

एक विशेष बातचीत में कमाल फारूकी ने आर एन आई संवाददाता से क्हा कि ‘‘मुझे यह बात समझ में नहीं आ रही कि मैंने ऐसा क्या किया या क्हा जो हमारे अपनों को गलत लगा।’’ हालांकि फारूकी ने साफ कर दिया कि वह इस फैसले पर कोई भी टिप्पणी करने को तैयार नहीं जब तक कि उनकी पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव से बात न हो जाए और स्वयं मुलायम सिंह अपना रूख स्पष्ट न कर दें। इस बाबत फारूकी ने पार्टी अध्यक्ष से समय मांगा है परन्तु यह खबर लिखे जाने तक मुलायम सिंह की ओर से कोई जवाब नहीं आया था। फारूकी कहते हैंः ‘‘मैं प्रतीक्षा करूंगा। मुलायम सिंह यादव मुसलमानों के बहुत बड़े शुभचिंतक हैं। वह मेरे पक्ष को अवश्य सुनेंगे।’’

कमाल फारूकी का कहना है कि उन्होंने वही क्हा जो समाजवादी पार्टी के मेनिफेस्टो में दर्ज है। समाजवादी पार्टी विभिन्न प्लेटफार्मों से कहती आई है कि निर्दोष मुस्लिम युवाओं का आतंकवाद के नाम पर पकड़े जाना बंद होना चाहिए। कितने ही केस सामने आए हैं जिसमें कई कई वर्ष की प्रताड़ना झेलने के बाद मुस्लिम युवकों को निर्दोष कहकर छोड़ दिया गया। न केवल समाजवादी पार्टी बल्कि दिग्विजय सिंह और के रहमान खां जैसे नेता भी इस विषय पर टिप्पणी करते रहे हैं। मैंने जो क्हा वह सच का साथ देने वाले तमाम भारतवासियों और देश के मुस्लिम युवाओं के दिल की आवाज है। मैं ने तो केवल उनके दिलों में बसी बात को आवाज दी।’’

बीते दिनों में फारूकी खुल कर कहते आए हैं कि इंडियन मुजाहिदीन जैसी आतंकवादी संस्थाओं का इस्लाम से कोई संबंध नहीं। परन्तु उनका यह भी रूख रहा है कि आतंकवाद को किसी धर्म विशेष से जोड़ना गलत है। वह कहते हैं कि ऐसा ही ब्यान उन्होंने यासीन भटकल के पकड़े जाने पर दिया था जिसमें कुछ भी गलत नहीं था।

फारूकी कहते हैंः ‘‘यासीन भटकल के पकड़े जाने पर ऐसा वावैला मचा कि जैसे कर्नाकट राज्य का छोटा सा कस्बा भटकल ही आतंकवाद का गहवारा हो। वहां अब हिन्दु और मुसलमान दोनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। न कोई टीचर वहां जाने को तैयार है न कोई डाक्टर। क्यों? क्योंकि भटकल ऐसा शहर बना दिया गया जैसे लगता है कि वहां केवल आतंकवादी रहते हैं। यही पहले उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ और बिहार में मधुबनी के साथ किया गया। हमें इससे सहमति नहीं। हमने अपनी पार्टी के मेनिफेस्टो, भारत के इंसाफपसंद आम आदमी और मुसलमानों के जजबात की अक्कासी करते हुए “word of caution” दिया था कि इसका ध्यान रखा जाए ताकि भारत का माहौल बिगड़ने न पाए।’’

हमारे संवाददाता द्वारा यह पूछे जाने पर कि पुलिस ने यासीन भटकल के पकड़े जाने के विषय में तमाम सबूत पेश किए हैं तो वह क्यों ऐसा कह रहे हैं, कमाल फारूकी ने क्हाः ‘‘यह सबूत किसको पता हैं। आप और हम को तो पता नहीं। यह तो वही पुलिस कह रही है जिसने कुछ दिन पहले लियाकत अली के लिए हर तरह के सबूत दिए थे। आप और हम यह मानने के लिए तैयार हो गए थे कि लियाकत अली बहुत बड़ा मुजरिम है और वह आतंकवादी है जो कश्मीर से भागा हुआ है। हम ने यह भी देखा था कि उसके नेपाल से दिल्ली तक के सफर की कहानी किस तरह गढ़ी गई थी, किस तरह से उसके टेलिफोन नम्बर हमें आप को दिए गए थे, किस तरह जामा मस्जिद के होटल के फोटो दिखाए गए थे। उसके बाद पता चला कि पुलिस ने सारी क्हानी फर्जी बनाई थी। हम किस पुलिस पर यकीन करें।’’

“या हम उस पुलिस पर यकीन कर लें जिसके कारण आमिर साढ़े चैदह साल जेल में रहा जिस में उसके शरीर के हर एक जख्मी अंग से यही चीख बार बार आ रही थी कि मैं बेगुनाह हूं। आखिर अदालत ने भी उसे मासूम मानते हुए रिहा कर दिया।’’

“क्या हम सीबीआई और आईबी के उस झगड़े को भूल जाएं जिस में हाई कोर्ट के आदेश पर तफतीश में पता चला कि आई बी जो भारत की सब से बड़ी संस्था है उसका एक सीनियर आफिसर गुजरात में बैठ कर नकली एनकाउंटर करा रहा था।’’

कमाल फारूकी कहते हैं कि भारत कोई banana republic नहीं कि यह सब होता रहे। विश्व के हर भाग में पुलिस के स्टेटमेंट को फाईनल नहीं माना जाता। हर जगह अदालत आखिरी फैसला करती है। कानून हमें बतलाता है कि unless proved guilty everybody is innocent.”

प्रश्न यह उठता है कमाल फारूकी ने जो क्हा यदि वही समाजवादी पार्टी के मेनिफेस्टो में दर्ज है तो फिर उनके खिलाफ ऐसा फैसला क्यों लिया गया? क्या दो वर्षों में दिल्ली में समाजवादी पार्टी का चेहरा बन चुके कमाल फारूकी की मीडिया में लोकप्रियता कुछ हलकों को नागवार गुजरी? फारूकी इसे सही नहीं मानते। वह कहते हैं कि दिल्ली में पार्टी के लीडर प्रोफैसर राम गोपाल यादव हैं और वह तो केवल एक छोटे से सिपाही हैं जो दो वर्ष पहले पार्टी में आए। ‘‘मैं उनकी बराबरी कैसे कर सकता हूं।’’ परन्तु फारूकी आहत जरूर हैं कि न तो किसी वरिष्ठ नेता ने उनका रूख जानने के लिए फोन किया और न ही कोई “show cause notice” दिया गया।

फारूकी कहते हैं कि ‘‘मै मीडिया में समाजवादी पार्टी के कारण नहीं हूं बल्कि पिछले 20 वर्ष से मुस्लिम दृष्टिकोण और राष्ट्र वादी दुष्टिकोण को न केवल भारत बल्कि विदेशों के बड़े टी वी चैनल और अखबारों में रखता आया हूं। समाजवादी पार्टी को मेरी इस पोजीशन का फाएदा ही होना चाहिए।’’

फारूकी कहते हैंः ‘‘मैं एक डिसिप्लिंड पार्टी सिपाही हूं। मैं बहुत सोच समझ कर पार्टी में आया था। मुझे नेता जी की नीयत पर और उनकी नीतियों पर कोई शक नही रहा। आज भी मुझे कोई शक नहीं है। मुझे लगता है कोई न कोई गलतफहमी अवश्य हुई होगी। वह नीतियां आज भी मुझे अजीज हैं। जिन नीतियों के कारण मैं पार्टी में आया उनसे मैं किसी भी कीमत पर कम्परोमाईज नहीं कर सकता। अगर कोई आदमी उन नीतियों को बदलने की कोशिश करेगा तो मैं उसका हिस्सा नहीं रह सकता।’’

यह पूछे जाने पर कि अब वह क्या करेंगे, फारूकी कहते हैंः ‘‘सारा का सारा डिपेंड करेगा नेता जी से बात होने के बाद। यह भी हो सकता है कि छोटा भाई समझ कर डांट कर चुप बिठा दें, यह भी हो सकता है कि मेरी बात से सहमत हूं और यह भी हो सकता है कि सहमत न हों। तीनों बातों में मेरा रूख अलग अलग होगा।’’

प्रोफैसर राम गोपाल यादव के पत्र द्वारा अवगत कराए जाने के बाद और निष्कासन की खबर के मीडिया में आने के बाद से कमाल फारूकी सपा अध्यक्ष से बात करने का समय चाह रहे हैं। ‘‘कल से बराबर बात करने की कोशिश कर रहा हूं। अगले दो चार दिन में उन्हें समय होगा तो शायद बात हो। मैं मुस्लिम मुद्दों की बात उठाता रहा हूं और इसी विषय पर चीफ सेकेट्ररी से बात करने लखनऊ गया था। मैं पार्टी में मुस्लिम मुद्दों को उठाने हेतु ही आया हूं। मैं अपने रूख पर कायम हूं। अपने उसूलों पर मैंने कोई कम्परोमाईज नहीं किया है और न आगे करूंगा। आगे भी मैं इन मुस्लिम मुद्दों को उठाता रहूंगा।’’

आर एन आई न्यूज नेटवर्क

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