संतों और पंडितों ने विश्व हिन्दु परिषद के खिलाफ खोला मोर्चा

संकल्प सभा के मुद्दे पर विहिप के खिलाफ जमकर बरसे संत और पंडित

Vishwa-Hindu-Parishad-leader

आर एन आई, नई दिल्लीः

विश्व हिन्दु परिषद और राम मंदिर न्यास द्वारा फैजाबाद में संकल्प सभा करने के फैसले पर स्वयं संतों और पंडितों ने इन संगठनों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। हालांकि चाक चैबंध कार्यवाई करते हुए प्रदेश के प्रमुख सचिव ग्रह अनिल कुमार और डीजीपी देवराज नागर ने न केवल भाजपा-संघ, विहिप व राममंदिर न्यास के एजेंडे पर पानी फेर दिया बल्कि आगामी चुनाव की इनकी तैयारी को कड़ी चुनौती दे दी। इसके बावजूद कई हिन्दु संत और पंडित अभी भी संतुष्ट नहीं हैं और विहिप के हिन्दुत्व एजेंडे पर ही प्रश्न उठा रहे हैं। आर एन आई से बात करते हुए ऐसे कुछ धर्मगुरू आज विहिप और सहयोगी संगठनों पर खूब बरसे।

यूनिवर्सल एसोसिएशन फार स्पिरिटुअल अवेयरनेस के संस्थापक अध्यक्ष पंडित एन के शर्मा ने क्हा कि किसी भी संगठन को राम मंदिर मामले में बोलने का अधिकार नहीं है जब तक कि न्यायालय कोई फैसला नहीं सुना देता।

पंडित एन के शर्मा ने क्हा कि ‘‘जहां तक विश्व हिन्दू परिषद का प्रश्न है, वह राजनीतिक कारणों से इस मुद्दे को गाहे बगाहे उठाती रहती है। हम ने कड़े शब्दों में क्हा है कि विश्व हिन्दू परिषद को हिन्दुओं का ठेकादार बनने का दावा नहीं करना चाहिए। इस देश में 80 करोड़ हिन्दू हैं और इनके कुल  20 लाख से अधिक सदस्य नहीं है। दूसरे देशों में यह सब को बढ़ चढ़ कर दिखाते हैं कि ये हिन्दुओं के प्रतिनिधी हैं ताकि इनको अधिकाधिक आर्थिक मदद मिल सके। न इनको हिन्दुत्व से कोई मतलब है, न इनको राम जन्मभूमि से कोई मतलब है। क्योंकि रामजन्मभूमि का मसला जमीन की हद का मसला है, इसका धर्म से कोई लेना देना नहीं है। यह केवल झूठ है आडंबर है। अयोध्या में 150 के करीब राम मंदिर हैं जिनमें से कुछ अतिक्षतिग्रस्त हैं। यदि यह राम मन्दिर के पक्षधर होते तो जो हजारों करोड़ रूप्या इन्होंने हिन्दुओं की धार्मिक भावनाओं का शोषण करके विश्व भर से उगाह रखा है उसको इन मंदिरों के निमार्ण पर खर्च करते। हमारा मानना है कि इन मामलों पर या तो दोनों समुदाय के लोग आपस में किसी निष्कर्श पर पहुंचें या न्यायालय जो फैसला करे वह दोनों पक्ष मान लें। इतिहास बताता है कि जब भी कभी चुनाव की स्थिति आती है तो इनको राम याद आ जाते हैं। इनका गोरखधंधा बिलकुल साफ है। यदि इनको रामजी से कोई मतलब होता, मंदिर में कोई आस्था होती तो अयोध्या में जो विभिन्न मंदिर बुरी हालत में पड़े हैं उनके निमार्ण की चिंता करते। इनको कौन रोक रहा है।’’

पंडित शर्मा ने क्हाः ‘‘राम चरित्र मानस में राम ने सरयु तट किनारे पूरी अयोध्या को अपनी जन्म भूमि बताया है। यदि आप राम के भक्त हैं तो राम की बात तो मानेंगे। राम ने अयोध्यावासियों को उपदेश देते हुए कहा है कि मुझ को कपट, छल और अन्याय करने वाले लोग बिलकुल पसन्द नहीं हैं। विश्व हिन्दु परिषद का पूरा इतिहास छल और कपट से भरा पड़ा है। इन्होंने न्यायायल में क्हा कि हम चबूतरे पर बैठ कर कीर्तन करेंगे। पर मस्जिद गिरा कर इन्होंने छल नहीं किया तो क्या किया? राम का नाम हमारे यहां मर्यादा पुरूषोत्तम के रूप में लिया जाता है। उन्होंने अपनी माता को दिए गए वचनों की रक्षा की खातिर राजाभिषेक होने के बावजूद वनवास जाना कबूल किया। उन्होंने हर प्रकार के आदर्श स्थापित किए। उन आदर्शों को तो मानो! उनका नाम लेने वाले यह लोग किसी मर्यादा का पालन नहीं करना चाहते। इनका रामभक्ति से क्या सरोकार? मेरी नजर में तो यह लोग अपराधी हैं, आतंकवादी हैं। जिन लोगों ने मनुष्यों को जिन्दा जला डाला, गर्भवती महिलाओं के गर्भ से बच्चे को निकाल कर मार डाला, लोगों के घर को आग लगा डाली, वह आतंकवादी नहीं तो क्या है?’’

अशोक सिंघल और आडवाणी जैसे भाजपा नेताओं के हिन्दुत्व एजेंडे पर उंगली उठाते हुए पंडित शर्मा ने क्हा कि ‘‘अशोक सिंघल और आडवाणी यदि हिन्दुत्व में आस्था रखते हैं तो क्या यह हिन्दु आस्था के अनुसार है कि वे लोग रथ पर सवार हो जाएं और साधु और महात्मा को पैदल चलाएं। यह तो हिन्दु विचारधारा का घोर अपमान है। जब इनकी सरकार छह साल रही तो इन्होंने ठंडे बस्ते में राम जन्मभूमि का मुद्दा क्यों डाल दिया। यानी सत्ता इनको ज्यादा प्यारी थी। यह तो सिद्ध कर चुके अपने आचरण से कि इनका राम और मन्दिर से कोई लेना देना नहीं है। अब हिन्दु जनमानस इनके बहकावे में नहीं आता। हिन्दुओं को चाहिए कि अपने धर्म की रक्षा करें।’’

उन्होंने आगे क्हा कि ‘‘हिन्दू विचारधारा के अनुसार पूरी वसुधा में रहने वाले लोग हमारे कुटुंब के समान हैं। राम चरित्र मानस में बालकांड में तुलसीदास जी ने लिखा कि प्राणी मात्र के सुख की प्राप्ति के लिए मैं यह रघुनाथ गाथा लिख रहा हूं। उन्होंने हिन्दु, मुस्लिम, सिख की कहां बात की? हर प्राणी की बात की। मनुष्य तो सब प्राणियों में बेहतर है। सांप, मछली, चींटी आदि को खिलाने के बाद हिन्दु अपने पूर्वजों को देते हैं। यह हिन्दुत्व है। इन लोगों का हिन्दुत्व से कोई सम्बंध नहीं है।’’

पंडित एन के शर्मा ने बताया कि अयोध्या का मतलब है वह धरती ‘जहां युद्ध न हो’। ‘‘यह भगवान राम का प्रियस्थल है। अशोक सिंघल आदि कहते हैं कि हम अयोध्या की ईंट से ईंट बजा देंगे। उसे तुम अखाड़ा बनाते रहते हो लड़ाई भिड़ाई का। अयोध्या के जितने भी महंत संत आदि हैं वह सब इनसे नफरत करते हैं कि यह हमारा कामधाम खराब करने के लिए आते रहते हैं। इन्हें तो धर्म का भी ज्ञान नहीं, न संविधान में आस्था है और न हिन्दुत्व से कोई लेन देन है। यह तो हिन्दुओं का माथा कलंकृत करने वाले लोग हैं।’’

नरेंद्र मोदी की बात करते हुए पंडित शर्मा कहते हैं कि वे तानाशाही प्रवृत्ति का आदमी है। ‘‘मुसलमानों को छोड़ दीजिए हिन्दु भी आज मोदी से नाराज है। प्रवीण टोगडिया मोदी से गुणा करता है। केशुभाई पटेल जिनके कारण मोदी राजनीति में आए, उनको इन्होने निकाल बाहर किया। शंकर सिंह वाघेला, संजय जोषी, हिरेन पांडया आदि के साथ क्या हुआ आप को पता है। किस के खिलाफ इन्होंने सीडी चलवा दी यह भी सब को पता है। यह सब तानाशाही नहीं तो क्या है। प्राब्लम यह है कि मीडिया सही बातें सामने लाना नहीं चाहता।’’

पंडित शर्मा तो आर एस एस को भी नहीं बख्शते। ‘‘आर एस एस ने अपने सिद्धांतों को तिलंाजलि दे दी। इनका गाईडिंग नारा था कि व्यक्ति से बड़ा संगठन है और संगठन से बड़ा राष्ट्र है। फिर राष्ट्र हित की बात करो। राष्ट्र में तो हर धर्म के लोग रहते हैं। यदि ये अपने सिद्धांतों पर नहीं चल सकते तो अपने नाम को बदल कर हिन्दु स्वयंसेवक संघ कर लेना चाहिए।

पंडित एन के शर्मा बताते हैं कि सनातन धर्म के अन्दर भविष्यपुराण में मौहम्मद साहब के आने से 3500 वर्ष पहले यह भविष्यवाणी है कि वह इस धरती के किस कोने में आएंगे, उनकी मां और बाप का नाम क्या होगा और कौन उनके चार साथी होंगे। आगे लिखा है कि मौहम्मद साहब नए मत की स्थापना करेंगे। पंडित शर्मा कहते हैं कि जब हमारे धर्मग्रंथ में ऐसा क्हा गया है तो मौहम्मद साहब हमारे लिए भी श्रद्धा के पात्र हैं।

संकल्प सभा किए जाने के मुद्दे पर ही हमने मथुरा के जगतगुरू शकराचार्य स्वामी अधोकशनंद जी महाराज से बात की तो उन्होंने विहिप की कार्यप्रणाली को पाप तक बता डाला। आर एन आई से बात करते हुए स्वामी जी ने क्हाः ‘‘हम लोग मंदिर और धर्मस्थानों की जो पूजा करते हैं, मंत्र जाप करते हैं, ओम शांति कहते हैं, राम राम या हर हर महादेव कहते हैं यह आत्म शांति के लिए, भाईचारा कायम करने और शांति की स्थापना के लिए करते हैं। मुझे लगता है कि जो कुरान शरीफ का पाठ करते हैं या इबादत करते हैं उनका भी मकसद शायद यही होगा कि वे खुद शांति पाएं और दूसरों को भी खुशी दंे। यदि अल्लाह का नाम नफरत फैलाने के लिए कोई लेता है या किसी को भड़काने के लिए हम हर हर महादेव का नारा लगाते हैं तो यह धर्म नही क्हा जाएगा। जब जब चुनाव करीब आता है तब कुछ लोगों को बुखार चढ़ जाता है। चार साल यह लोग शांत थे अब आखिर क्या हो गया है कि 15 दिन बीतने नहीं पाता यह कुछ न कुछ नया ले आते हैं। अभी एक महिना नहीं बीता है इनको अयोध्या परिक्रमा किए, फिर से नया मुद्दा ले आए हैं। धर्म की बात केवल धार्मिक मामले में इस्तेमाल होना चाहिए, राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में यदि कोई इसका इस्तेमाल करता है तो ऐसा करना पाप है।’’

स्वामी जी ने क्हा कि अयोध्या शांति का प्रतीक है। लेकिन इन लोगों की हरकतों से वहां बार बार लड़ाई फैल रही है। इन्हें शुद्ध रूप से केवल राजनीति करना चाहिए और धर्म को राजनीति से नहीं जोड़ना चाहिए।

उन्होंने क्हा कि यह चाहे 84 परिक्रमा करें या संकल्प सभा, इस सब का धर्म से कोई लेन देन नहीं है। ‘‘इनकी करतूत से धर्म शर्मिंदा होता है। जब सरकार बनी थी एनडीए की तो क्यों तुम ने क्हा था कि राम मंदिर हमारे एजेंडे में नहीं है। जब तुमने इसी मुद्दे पर प्रचार किया था तो तुम ने वोट देने वालों को क्यों धोका दिया। तुमने तो हिन्दुत्व को ही किनारे कर दिया। क्यों आर एस एस और भाजपा ने इन्हें नहीं चेताया।

स्वामी जी ने आगे क्हा कि ‘‘हम मरते हैं तो हिन्दु हैं, जगते हैं तो हिन्दु हैं, सोते हैं तो हिन्दु हैं। ऐसा नहीं कि लाभ है तो हिन्दु हैं और लाभ नहीं है तो हिन्दु नहीं। इन्हें अपना चरित्र सुधारना चाहिए और ऐसा कुछ नहीं करना चाहिए कि सामाजिक सौहार्द को ठेस पहुंचे और जो संवेधानिक तानाबाना है उसको आंच आए। हमको विदेशी परिस्थितियां भी देखना चाहिए। पड़ौसी हमारे देश में तोड़ फोड़ करना चाहते हैं और यहां भेद पैदा करके अशांति पैदा करना चाहते हैं। ऐसे में हमें चाहिए कि हम ऐसी कोई हरकत न करें कि हमारे दुश्मनों को लाभ हो।’’

रियल न्यूज इंटरनेश्नल न्यूज ब्यूरो

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