पुराने तौर तरीके को त्याग कर नियामक आयोग डीईआरसी ने सदस्य की नियुक्ति के लिए साक्षात्कार आयोजित किया

DERCआर एन आई, नई दिल्लीः

सदस्य-डीईआरसी (दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग) के पद को कभी भी साक्षात्कार के माध्यम से नहीं भरा गया। यह आम तौर पर एक राजनीतिक नियुक्ति हुआ करती थी। परन्तु पुराने तौर तरीकों को त्याग कर, डीईआरसी ने संभावित उम्मीदवारों का आवेदन बुलाया है और साक्षात्कार के माध्यम से सदस्य-डीईआरसी का चयन कर रही है। इस खबर के प्रेस में जाने के समय दिल्ली सचिवालय में मुख्य सचिव के कार्यालय में 7 वरिष्ठ अफसरों के पैनल के सम्मुख साक्षात्कार जारी थे। 16 मई को आम चुनाव का निर्णय आने के पश्चात शीघ्र ही इस पद के भरे जाने की उम्मीद है।

सदस्य-डीईआरसी के पद की नियुक्ति के लिए यह साक्षात्कार ऐसे समय में हो रहा है जब डीईआरसी अदालत के अन्दर और बाहर बिजली से संबंधित विभिन्न मुद्दों का हल तलाश करने की कोशिश में लगी है। डीईआरसी ने हाल ही में रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और टाटा पावर की बिजली वितरण करने वाली कंपनियों के अनुरोध को अस्वीकार कर दिया था जिसमें उन्होंने तुरंत बिजली की दरों पर सरचार्ज को वर्तमान में 6 से 8 प्रतिशत से बढ़ा कर 15 से 33 प्रतिशत करने की अनुमति मांगी थी।

वितरण कंपनियों ने यह कहते हुए एनटीपीसी और अन्य आपूर्तिकर्ताओं से खरीदी बिजली का भुगतान नहीं किया है कि डीईआरसी ने पर्याप्त टैरिफ नहीं दिलवाया है। एनटीपीसी ने भुगतान नहीं किए जाने के कारण बिजली आपूर्ति में कटौती की धमकी दी थी परन्तु सुप्रिम कोर्ट ने उसे सामान्य आपूर्ति जारी रखने का निर्देश दिया। दिल्ली सरकार ने अदालत के सामने यह तर्क दिया था कि बीएसईएस कंपनियां असक्षम थीं जिसके चलते वे भुगतान करने में असमर्थ रहे जब्कि इसी प्रकार की परिस्थितियों में काम करते हुए टाटा समूह की वितरण कंपनी ने तमाम रकम का भुगतान कर दिया।

दिल्ली में बिजली वितरण करने वाली तीन कंपनियों का कहना है कि पिछले वर्षों में बिजली वितरण के दौरान उनका कुल नुकसान पन्द्रह हजार करोड़ से अधिक पहुंच चुका है। रिलायंस ए.डी.ए.जी. ने यहां तक क्हा है कि वे कारोबार के तहत इस क्षेत्र में आए हैं और वे अधिक घाटा बरदाश्त नहीं कर सकते। दूसरी ओर डीईआरसी से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि कारोबार के लिए अन्य बहुत रास्ते हैं परन्तु उपभोक्ता के हित सर्वोप्रिय हैं। हाल ही में सुप्रिम कोर्ट में दिए गए एक ब्यान में डीईआरसी ने संकेत दिया था कि वितरण कंपनियों का सी.ए.जी. द्वारा आॅडित किया जाना चाहिए। दिलचस्प बात यह है कि आप नेता अरविंद केजरीवाल एक लंबे समय से इस मांग को दोहराते आए हैं।

एक और गर्मागर्म बहस का मुद्दा यह बना हुआ है कि डीईआरसी ने क्हा कि वह टाटा पावर की याचिका का समर्थन करती है कि वह सरकार के आर्थिक रूप से अलाभकारी गैस आधारित स्टेशनों से बिजली खरीद बंद कर दे। याचिका को मंत्रालय भेज दिया गया है जो नया बिजली खरीद समझौता तैयार कर सकती है।

वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है कि उन्हें इस बात पर कोई आपत्ति नहीं है कि बिजली वितरण कंपनियां किसी दूसरे माध्यम से बिजली खरीदें। उनका कहना है कि इस विषय में दिल्ली सरकार और केन्द्रीय उर्जा मंत्रालय अंतिम निर्णय लेगा। बिजली वितरण कंपनियों ने ऊर्जा विभाग और डीईआरसी को अवगत करा दिया है कि गैस आधारित संयंत्रों से उत्पादित बिजली महंगी है और इसके कारण टैरिफ पर असर पड़ता है। यह कंपनियां अन्य स्त्रोतों से सस्ती बिजली खरीद के रास्ते देख रही हैं और अब तक बवाना स्थित गैस आधारित संयंत्र से गठजोड़ करने से परहेज करती आई हैं। हालांकि निरंतर बढ़ते तापमान और आने वाले हफतों में बिजली की बढ़ी मांग के चलते उनके पास कम ही विकल्प बचते हैं।

बिजली पर सब्सिडी एक और मुद्दा है जिसपर उपभोक्ताओं की नजर है। वर्तमान सब्सिडी शीघ्र ही समाप्त हो रही है और यह आशंका है कि निकट भविष्य में बिजली दरों में बढ़ौतरी हो सकती है। शीला दीक्षित सरकार ने 400 युनिट तक बिजली प्रयोग करने वालों को दो सलैब में सब्सिडी दी थी। दिल्ली का मुख्यमंत्री बनने पर अरविंद केजरीवाल ने उपभोक्ताओं के लिए बिजली को और अधिक सस्ता करने की घोषण कर दी थी।

नामांकन के पिछले तरीके को बदलते हुए सदस्य-डीईआरसी की नियुक्ति के लिए इस बार साक्षात्कार रखे जाने का कारण पूछे जाने पर डीईआरसी से जुड़े एक अधिकारी ने अपना नाम न घोषित करने की शर्त पर हमें बताया कि ऐसे बड़े और पेचीदा मुद्दे सामने होने के कारण डीईआरसी चाहती है कि वह सब से बेहतरीन उम्मीदवार का चयन करे जिसकी अखंडता संदिग्ध न हो, जो काम करे और जो डीईआरसी के कार्यों के निर्वाहन में मदद करे।

सदस्य-डीईआरसी की नियुक्ति पांच वर्ष के लिए की जाती है। करीब एक दर्जन उम्मीदवारों का साक्षात्कार हो चुका है जिनमें सेवा निवृत सरकारी अफसर एवं निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के लोग सम्मिलित हैं। बुधवार को साक्षात्कार पुनः आयोजित किए जाएंगे।

रियल न्यूज इंटरनेश्नल न्यूज ब्यूरो

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