मनमोहन सिंह के शासन में वर्चस्व में रहे बाबुओं की पुनः नियुक्ति पर प्रश्न चिह्न

red-tape-bureaucrat-620x400यदि मंत्रियों के इर्द र्गिद वही लोग मंडलाते रहे तो कैसे पूरा होगा नरेंद्र मोदी का बेहतर कल का सपना

लोक सभा चुनाव में कांग्रेस की निराशाजनक पराजय के कारणों का हवाला देते हुए भाजपा उपाध्यक्ष और प्रवक्ता मुख्तार अब्बास नकवी ने आरएनआई को दिए अपने एक हालिया साक्षात्कार में क्हा थाः ‘‘ऐसा नहीं है कि कांग्रेस के राज में अच्छे काम नहीं हुए। लेकिन वह लोगों तक पहुंच ही नहीं पाए। पालिसी बना देना, उस पर पैसे बहा देना अलग चीज है और वह लाभ लोगों तक पहुंचे यह अलग। सरकार अपना इकबाल समाप्त कर चुकी थी। पालिसी बनती थी परन्तु सत्ता के इर्द गिर्द बैठे लोगों के बीच ही बन्दरबाट होकर समाप्त हो जाती थी। अवाम उन पालिसियों से अछूते ही रहे। यही कारण है कि वे अपने को ठगा ठगा सा महसूस कर रहे थे।’’

नकवी के अनुसार मंत्रियों के इर्दगिर्द जमा लोग, बाबू और कई साथी कांग्रेसी जिन्होंने कांग्रेस वर्कर के रूप में कम और पावर ब्रोकर के रूप में अधिक काम किया, कांग्रेस के पतन का प्रमुख कारण बने। इसके कारण कांग्रेस ने जनता का भरोसा खो दिया, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में वोट भाजपा को स्थानांत्रित हो गए। आम भारतीय को नरेंद्र मोदी सरकार से बड़ी आशाएं हैं, जिसको वे एक नई सुबह और अच्छे दिनों के आगमन की उम्मीद की एक नई किरण के रूप में देखते हैं। नरेंद्र मोदी अपने वादों पर पूरा उतरने की कोशिश कर रहे हैं और सरकारी कामकाज के तौर तरीकों में परिवर्तन के संकेत दिए हैं।

परन्तु यदि केवल मंत्री बदलें और उनके इर्द गिर्द काम करने वाले अधिकारी, बाबू और उनका निजी स्टाफ जो कि मंत्रियों को राय मश्विरा देता है और पालिसियों के कार्यावाहन में अहम भूमिका निभाता है ज्यों का त्यों बना रहे तो बड़ा बदलाव कैसे आ सकता है। इनमें से कुछ तो स्वयं कांग्रेस राज में पालिसियों का लाभ जनता तक न पहुंचने और पैसे के बन्दरबाट के दोषी हैं। नरेंद्र मोदी सरकार भी ऐसा ही सोचती है। इसी कारण से उसने उन अधिकारियों की नियुक्ति पर फिलहाल रोक लगा दी है जो यूपीए सरकार के मंत्रियों के निजी स्टाफ में थे और इस शासन में कुछ मंत्रियों ने उन्हें अपने निजी सचिव के रूप में काम करने के लिए चुना है।

‘‘जब मैंने उनसे पहली बार मुलाकात की तो उन्होंने खुद का कांग्रेस से जुड़े एक राजनीतिक के रूप में परिचय कराया। मैंने और पूछा तो उन्होंने क्हा कि वह मनमोहन सरकार में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के सब से करीबी व्यक्ति हैं। बाद में मुझे पता चला कि वह अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के रहमान खां के निजी सचिव के रूप में काम कर रहे हैं,’’ एक पत्रकार ने बताया। सूचना के अनुसार अब यही व्यक्ति नरेंद्र मोदी सरकार में अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्ला के निजी सचिव के रूप में काम करने की तैयारी कर रहे हैं।

कांग्रेस के राज्यकाल के दौरान राज्य सभा में दिए गए अपने एक प्रख्यात भाषण में मुख्तार अब्बास नकवी ने क्हा थाः यदि आप (कांग्रेस) ने खुले तौर पर जहर दिया होता तो यह स्पष्ट हो गया होता कि आप धर्मनिरपेक्ष नहीं हैं। इसलिए आप ऐसे काम कर रहे हैं कि अल्पसंख्यक पिछड़े रहें, कमजोर रहें, शिक्षा में पीछे रहें और अल्पसंख्यकों को चारों ओर से तरक्की की केंद्रीय लहर से काटे रखें।

यह स्पष्ट है कि मंत्रियों का निजी स्टाफ और नौकरशाही ही मंत्री को सलाह देते हैं, नीतियों को आगे बढ़ाते हैं या उनके कार्यान्वयन पर रोक लगा देते हैं। यदि भाजपा की नई सरकार के मंत्री उसी पुराने स्टाफ को लेने की जिद करते हैं जिनमें कुछ दागी हैं, अपने प्रियजनों को लाभ पहुंचाते रहे हैं या पैतृक शहरों और कस्बों के आसपास काम कर रही संस्थाओं को कुछ निजी कारणों से लाभान्वित करते रहे हैं तो जमीनी स्तर पर स्थिति में बहुत बदलाव नहीं आएगा भले ही प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी एक सकारात्मक बदलाव लाने के लिए दृढ़ संकल्प हों और प्रतिबद्धता दिखाएं।

ऐसा नहीं है कि पिछले तमाम मंत्रियों के साथ काम करने वाले अधिकारी दागदार हैं। कुछ तो बहुत ही कुशल प्रबंधन और प्रशासन के लिए जाने जाते हैं; इन में गृह मंत्री राजनाथ सिंह के निजी सचिव जो पूर्व में सलमान खुर्शीद के साथ थे और मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी के निजी सचिव जो पूर्व में बेनी प्रसाद वर्मा के साथ कार्यरत थे उल्लेखनीय हैं। इसी प्रकार के अन्य मामलों में कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद हैं जिनके निजी सचिव तारिक अनवर के साथ थे और अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्ला हैं जिनके निजी सचिव के. रहमान खां के साथ काम कर रहे थे।

सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट सचिव अजित सेठ ने मंत्रियों के निजी स्टाफ की नियुक्ति पर फिलहाल रोक लगा दी है, विशेष रूप से उन अफसरों की नियुक्ति पर जो पूर्व में यूपीए सरकार में रहे मंत्रियों के निजी सचिव के तौर पर काम करते रहे हैं। इनमें प्रधान मंत्री कार्यालय में एक वरिष्ठ नौकरशाह की नियुक्ति भी शामिल है।

आर एन आई न्यूज ब्यूरो

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