भाजपा से जो बुद्धिजीवी जुड़ रहे हैं वे वाम दलों की तुलना में कहीं अधिक विकासात्मक हैंः मधु किश्वर

PhotoMadhuKishwar‘‘भाजपा से जो बुद्धिजीवी जुड़ रहे हैं वे उन बुद्धिजीवियों की तुलना में कहीं अधिक विकासात्मक हैं जो वाम दलों से जुड़े हैं। वामपंथि उन बुद्धिजीवियों को जोड़ते हैं जो दोष देखते तो हैं परन्तु केवल दोष ढूंढने तक ही सीमित रहते हैं। आलोचनाओं के अतिरिक्त उनके पास कुछ नहीं है। उनके नजदीक सब कुछ हमेशा के लिए गलत है। ऐसा ही वे वातावरण बनाते और पेश करते हैं। परन्तु भाजपा के साथ जो बुद्धिजीवी जुड़ रहे हैं वे सफल आईटी इंजीनियर हैं, सफल वैज्ञानिक हैं और बड़ी कंपनियों में उच्च पदों पर कार्यरत हैं। गरीबी बेच कर या गल्ती खोज कर उन्हें अपना करियर बनाने की आवश्यकता नहीं। जहां वामपंथि बुद्धिजीवी इस सब से ही अपने करियर बनाते हैं, हमसे जो बुद्धिजीवि जुड़ रहे हैं वे पहले से ही सफल हैं, अपना करियर बना चुके हैं और देश के बारे में चिंतित हैं। हमारे पास जो लोग हैं वे समस्या का समाधान ढूंढने वाले हैं। क्यूंकि वे पहले से ही सफल हैं उन्हें जीविकोपार्जन हेतु इस प्रकार के प्रयासों की आवश्यकता नहीं है; उनकी मात्र चिंता भारत के सामने उपस्थित विभिन्न समस्याओं का हल ढूंढने में है।’’

गोवा में हाल ही में आयोजित ‘इंडिया आईडियाज़ कान्क्लेव’ से पलटने पर मधु किश्वर ने आर एन आई के साथ एक विशेष बैठक में इन शब्दों में अपने अनुभव को पेश किया। गोवा के अपने अनुभव को बताते हुए किश्वर ने क्हाः ‘‘मुझे व्यक्तिगत तौर पर ऐसे लोगों से मिलने और उनकी बात सुनने में बड़ा आनंद आया जो बहुत ही सकारात्मक ऊर्जा के साथ वहां आए थे। यह लोग भारत की बेहतरी के लिए कुछ करना चाहते हैं।’’

मधु किश्वर प्रसन्न हैं कि भाजपा ने पहली बार उन बुद्धिजीवियों के लिए एक मंच बनाया है जो वाम राजनीति से संबंधित नहीं हैं और जो ‘‘वाम राजनीति को भारत के लिए हानिकारक मानते हैं।’’ वह कहती हैंः ‘‘मैं स्वयं वाम स्पेक्ट्रम से संबंधित रही हूं और मैंने देखा है उनकी राजनीति कितनी हानिकारक है। ऐसे में हम जैसों के पास जाने के लिए कोई मंच नहीं था। यह एक महत्वपूर्ण प्रयास था क्योंकि आप मेरे टवीट्स से देख सकते हैं कि मैं न तो भाजपा से हूं न ही भाजपा की वफादार हूं। मैं मुद्दों पर उन्हें समर्थन देती हूं और जहां आलोचना करना होती है तो पीछे नहीं हटती हूं। जब मुझे लगता है कि वे अच्छा कर रहे हैं तो हम प्रसन्न होते हैं। मेरे जैसे बहुत लोग हैं जो भाजपा के हित में आलोचना करते हैं।’’

किश्वर वाम-स्वामित्व या वाम-समर्थित गैर सरकारी संगठनों की खुल कर आलोचना करती हैं। ‘‘वाम पंथियों ने गरीबी को सजा कर पेश करने की संस्कृति विकसित की है। विशेष रूप से गैर सरकारी संगठन जो उनके साथ जुड़े हैं। जब भी और जहां भी दंगे होते हैं, उन्हें उसमें पैसा दिखाई देता है। वह शोध यहां करते हैं परन्तु कोलम्बिया विश्वविद्यालय में जाकर पेपर प्रस्तुत करते हैं। समस्या यहां होती है परन्तु उसपर चर्चा अमरीका, स्वीडन और डेनमार्क में होती है। इस कार्यप्रणाली से मुझे नफरत होती है। यह स्थिति हम से एकदम विपरीत है। बुद्धिजीवि अमरीका से यहां आकर भारत के हित में बोलते हैं। वे भारत को बेहतर भारत बनाने में प्रयासरत हैं।’’

जो अनभिज्ञ हैं उनकी जानकारी के लिए गोवा में हाल ही में सम्पन्न इंडिया आईडियाज़ कान्क्लेव भारतीय दक्षिणपंथ द्वारा एक स्थायी बौद्धिक फोरम के निमार्ण की ओर एक महत्वपूर्ण कदम था। गोवा सरकार के सहयोग से और इंडिया फाउंडेशन जो भारतीय राजनीति पर एक स्वतंत्र अनुसंधान केंद्र है द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में मानवीय मूल्यों पर बातचीत करने के लिए विश्व भर से बुद्धिजीवियों को आमंत्रित किया गया था। इस सम्मेलन में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े 70 से अधिक प्रख्यात विद्वानों ने 400 से अधिक चयनित प्रतिभागियों के समूह को संबोधित किया।

आर एन आई न्यूज ब्यूरो

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