सूरजकुंड मेले में सीरत नरेंद्र ने प्रस्तुत की ऋतु-स्वर-लहरी

DSC_0023जब रंगीन ऋतु की चादर ओढ़े, सज जाती है प्यारी धरती, मोहक वसन्त फूल खिलाता है, चंचल ग्रीष्म मन में उल्लास और आनंद जगाती है, अल्हड़ वर्षा मन में नये अहसास जगाती है और शरद ऋतु हेमन्त चाँदनी छिटकाती सौम्य शिशिर शीतलता लाती है, तो ऐसे में कौन कला का दीवाना ऐसा है जो रंगीन छटा बिखेरती विभिन्न ऋतुओं के अहसास को अपनी कला के माध्यम से पेश कर सके। यह साहस किया है सीरत नरेंद्र ने जिन्होंने भारत की धरती को सुगन्धित करती विभिन्न ऋतुओं को छोटे से कैनवस पर नहीं बल्कि सूरजकुंड मेले के लम्बे चैड़े मैदान में बड़े ही सम्मोहित ढंग से पेश करने की सफल कोशिश की है।

हमारे भारत-देश को प्रकृति ने विशेष वरदान के रूप में षट् ऋतुओं से सजाया है। प्रत्येक ऋतु अपना अलग सौंदर्य, आकर्षण और सम्मोहन रखती है। सीरत ने प्रकृति के इन ही विभिन्न रंगों को मानव रचनात्मक प्रतिभा द्वारा सूरजकुंड मेला परिसर में चित्रित किया है। एक फरवरी से हजारों की संख्या में रोज आते मानवसमूह को भारत के विभिन्न मौसमों के रोमांस का एक विस्तृत मैदान में खूबसूरत चित्रण सूरजकुंड मेला में देखने को मिल रहा है। यह मेला पन्द्रह फरवरी तक चलने वाला है।

Photo - Seerat Narendra

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सीरत नरेंद्र बताती हैंः इस वर्ष ऋतु-स्वर-लहरी’ के अन्तर्गत विभिन्न ऋतुओं से जुड़े कुछ पर्वों तथा रंगों के माध्यम से उनके आलंकारिक तत्वों की परिकल्पना की गई है। जाति, धर्म, भाषा, क्षेत्र तथा देश से परे यह सद्भाव परस्पर दिलों में समरसता के प्रवाह का द्योतक है। जिस प्रकार, प्रकृति सूक्ष्मता से एक ऋतु में विलीन होकर, तत्पश्चात् अन्य ऋतु में प्रविष्ट होती है, उसी प्रकार, मानव-जीवन भी भौगोलिक सीमाओं से परे, अपने संस्कारों के साथ अन्य संस्कृतियों के समावेश से, परस्पर सम्वाद बनाते हुए सम्वर्द्धित होता है।

कहते हैं कि कलात्मकता तीन स्तंभों – खोज, कल्पना और अविष्कार – द्वारा सुन्दरता की सीमाओं को लांघने की कोशिश करती है। सच्चा कलाकार इन तीन प्रमुख स्तंभों के विपुल मिश्रण द्वारा अपनी रचनात्मक प्रतिभा को उजागर करता है। सीरत नरेंद्र की प्रशंसा केवल इसलिए नहीं करना क्योंकि उन्होंने सूरजकुंड मेले की सुन्दरता को चार चांद लगा दिये परन्तु इसलिए कि जो मेला प्रसिद्ध ही है इसलिए कि इसमें देश भर के कलाकार आकर अपनी कला का नमूना पेश करते हैं सीरत ने सूरजकुंड मेला की पृष्ठभूमि को ऐसे सजाया और निखारा है कि वह पृष्ठभूमि स्वयं ही कला का नमूना बन गयी है। इस हद तक कि आगंतुक बड़े उत्साह से सीरत द्वारा सजाये संवारे गये सूरजकुंड परिसर के विभिन्न स्थलों पर फोटो खिंचवाने में बड़ा आनंद लेते दिखाई दे रहे हैं।

DSC_0053चाहे वसन्त में सरसों के लहलहाते खलिहान हों यावसन्त-पंचमी’ या सरस्वती-पूजा’ के दृष्य; ग्रीष्म की सुनहरी धूप का माहौल उत्पन्न करना हो या बुद्ध-पूर्णिमा, ‘ईद’ जैसे पर्व की खुशी; वर्षा के आगमन के सूचक नाचते मयूर हों या ‘तीज’ जन्माष्टमी’ की गहमागहमी; ‘दशहरे’ के अवसर पर मस्त-हाथियों की शोभायात्रा हो या दीपों की अवलि’ के साथ शरद्/हेमन्त ऋतु का प्रवेश; और चाहे क्रिसमस’; ‘लोहड़ी’, ‘मकर-संक्रांति’ जैसे उत्सवों का प्रतिबिम्ब दर्शाती शिशिर ऋतु हो – सीरत नरेंद्र ने इस सब छटा को बड़ी कुशलता के साथ सूरजकुंड मेला परिसर में फैलाया है। इसी संकल्पना से आयोजित इस मेले में आने वाले सभी दर्शक/आगन्तुक आनन्दोल्लास के भाव से परितृप्त होते हैं।

अजीज हैदर द्वारा आर एन आई न्यूज एजेंसी के लिये

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