हमें प्रसन्नता है कि भारत की शिक्षा मंत्री एक मां है और मां अपने बच्चों को कभी अशिक्षित नहीं रहने देगीः अख्तरूल वासे

पैगम्बर मौहम्मद ने अपने अनुयायियों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा था कि इल्म प्राप्त करो मां की गोद से कब्र तक। यानी यह कि पैगम्बर मौहम्मद के हर अनुयायी के लिए आवश्यक है कि वह मौत आने तक शिक्षा प्राप्त करता रहे। प्रश्न यह उठता है कि इस्लाम में शिक्षा पर इतना जोर दिए जाने के बावजूद मुसलमान शिक्षा के क्षेत्र में पिछड़े क्यों रह गये। क्यों उनकी अनदेखी होती रही? क्या केंद्र में भाजपा सरकार आने के पश्चात मुसलमान यह सपना देख सकते हैं कि अब उनको बेहतर शिक्षा के अवसर प्राप्त होंगे? आने वाले पांच वर्षों में क्या हम शिक्षा के क्षेत्र में नई उप्लब्धियां देखेंगे? क्या भारत की शिक्षा मंत्री स्मृति ईरानी इस भार को उठा पाने में सक्षम हैं? ऐसे ही अनेक प्रश्नों पर आर एन आई ने बात की लिंगविस्टिक माईनारिटीज़ के कमिश्नर अख्तरूल वासे से। पढि़ए अख्तरूल वासे से बातचीत के अंशः

 

Prof. Akhtarul Wasey - Commissioner for Linguistic Minorities in India

Prof. Akhtarul Wasey – Commissioner for Linguistic Minorities in India

‘‘इसमें कोई शक नहीं कि अल्लाह के रसूल ने अपने अनुयायियों को अच्छे और बुरे हर हालात में शिक्षा प्राप्त करते रहने का उप्देश दिया था। उनका कथन कि इल्म हासिल करो मां की गोद से कब्र जाने तक सब को पता है। परन्तु इसके बावजूद भारत में मुसलमान शिक्षा के क्षेत्र में लगातार पिछड़ता गया और कोई गंभीर प्रयास नहीं हुआ उसको शिक्षा के समान अवसर देने का।’’ यह मानना है लिंगविस्टिक माईनारिटीज कमिश्नर और प्रख्यात शिक्षाविद अख्तरूल वासे का। परन्तु अख्तरूल वासे निराश नहीं हैं! केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री सुश्री स्मृति ईरानी से उन्हें आशा है कि वह भारत के तमाम नागरिकों को शिक्षा के समान अवसर प्रदान करने में मदद करेंगी। आर एन आई से बात करते हुए अख्तरूल वासे कहते हैंः ‘‘हमें प्रसन्नता है कि आज भारत की शिक्षा मंत्री एक मां है और मां अपने बच्चों को कभी अशिक्षित नहीं रहने देगी।’’

इसको कड़वी सच्चाई बताते हुए अख्तरूल वासे ने कहा कि ‘‘बात कड़वी सही लेकिन सच्ची है। इस देश में मुसलमानों के पीछे रह जाने का मूल कारण यह है कि उनके इलाकों में स्कूल कम और थाने अधिक खोले गए। उनको शिक्षा के अवसर मिले ही नही ंतो वे कैसे शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ते।’’ उन्होंने क्हा कि गत दिनों में जब से सुश्री स्मृति ईरानी ने मानव संसाधन मंत्रालय की जिम्मेवारी संभाली है, आशा की एक नई किरण जागी है। ‘‘आज जब सुश्री ईरानी की कयादत में नया भारत करवट ले रहा है और मुसलमानों के हालात से भली भांति वाकिफ जफर सरेशवाला जैसे ईमानदार व्यक्ति उनके साथ हैं तो यह आवश्यक हो जाता है कि हम पिछली पालिसी को बदलते हुए मुसलमानों को भी समान शिक्षा के अवसर प्रदान करने के प्रावधान करें।’’

Ms. Smriti Irani - Union Minister for Human Resource Development

Ms. Smriti Irani – Union Minister for Human Resource Development

इस विषय पर चेताते हुए अख्तरूल वासे कहते हैं कि यदि 2025 तक भारत को विश्व पटल पर एक शक्तिशाली देश के रूप में उभरना है तो यदि 15 से 16 प्रतिशत जनसंख्या पीछे रह जाएगी तो यह संभव नहीं हो पाएगा। हम मुसलमान की बात नहीं करते बल्कि हिन्दुस्तान की बात करते हैं।  क्योंकि हिन्दुस्तान तरक्की करेगा तो मुसलमान तरक्की करेगा। हिन्दुस्तान की इज्जत होगी तो मुस्लमान की इज्जत होगी।’’

‘‘मुसलमान अलग से कुछ नहीं चाहता। जिसमें भारत का भला है उसमें मुसलमान का भला है। मुसलमान को भी समान अवसर चाहिए, भागीदारी चाहिए, रियायत नहीं चाहिए। ताकि हमारी नई पीढ़ी भारत मां को समर्पित होकर उसके उज्जव्ल भविष्य का निर्माण करने में अपनी हिस्सेदारी निभाने का स्वपन पूरा कर सके। हमारी नई पीढ़ी को उसके इस सपने को पूरा करने का मौका हर कीमत पर मिलना चाहिए,’’ श्री वासे ने क्हा।

अख्तरूल वासे ने क्हा कि मानव संसाधन मंत्रालय वह मंत्रालय है जिसमें आजादी के पश्चात पहले मंत्री अबुल कलाम आजाद थे। अबुल कलाम आजाद मुसलमान भी थे, उर्दू वाले भी थे और ऐसे भारतीय थे जिन्होंने भारत में किसी तरह के अलगाववाद का खुलकर विरोध किया। 1934 में दिल्ली में बोलते हुए उन्होंने कहा था कि यदि आकाश से एक देवदूत उतरे और कुतुब मीनार की चोटी पर खड़े होकर कहे कि भारत को स्वराज इस शर्त पर मिल सकता है कि वह हिन्दू मुस्लिम एकता की तिलांजलि दे दे तो मैं स्वराज से पीछे हट जाउंगा क्योंकि यदि हिन्दू मुस्लिम एकता खंडित हुई तो यह मानवता की बहुत बड़ी क्षति होगी।

श्री वासे ने कहा कि अबुल कलाम आजाद बहुत बड़े शिक्षाविद थे। उन्होंने भी किसी बड़ी यूनिवर्सिटी में शिक्षा प्राप्त नहीं की थी बल्कि एक मदरसे में पढ़े थे। उन्होंने आशा जताई कि सुश्री स्मृती जुबीन ईरानी अबुल कलाम आजाद की विरासत को आगे बढ़ाते हुए देश में शिक्षा को नए आयाम प्रदान करेंगी।

अख्तरूल वासे ने स्मृति ईरानी की प्रशंसा की कि किस खूबी से उन्होंने जरमन और संस्कृत भाषा के बीच पैदा हुए विवाद का समाधान किया। उन्होंने बताया कि सुश्री ईरानी का एक बड़ा कारनामा यह भी है कि उन्होंने उर्दू भाषा के प्रोत्साहन के लिए कौमी काउंसिल बराए फरोग उर्दू को बनाया। ‘‘आईए हम भारत में मुसलमान हों या आम भारतीय, सब के लिए ऐसी नीति तैयार करें जो मोदी जी के ‘सब का साथ सबका विकास’ के सपने को केवल सपना न रहने दे बल्कि सच कर दिखाए; इसके लिए आवश्यक होगा कि हम एक दूसरे पर शक करने के स्थान पर सब को शिक्षा क्षेत्र में भागीदारी के समान अवसर प्रदान करें।

आर एन आई न्यूज ब्यूरो

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