वरिष्ठ अध्यापक मध्यान्ह भोजन को चखेगा, दिल्ली शिक्षा विभाग की ओर से आया नया फरमान

मध्यान्ह भोजन में पानी के सिवा कुछ नहीं, अध्यापकों ने नये फरमान को बेकार बताया

आर एन आई, दिल्लीः

Manish Sisodia tasting food at a Delhi School

Manish Sisodia tasting food at a Delhi School

दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों को भेजे गये एक नये फरमान के अनुसार बच्चों को मध्यान्ह भोजन देने वाले स्कूलों में बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने से पहले किसी वरिष्ठ अध्यापक को भोजन को चखना होगा और अपनी ‘ओके’ रिपोर्ट देना होगी। अध्यापक इस नये हुक्मनामे को फुजूल का नाटक बता रहे हैं और कहते हैं कि इससे भोजन की गुणवत्ता पर कोई प्रभाव नहीं पड़ने वाला। बल्कि उस बेचारे शिक्षक को मजबूरन उस बेस्वाद खाने को गले से उतारना होगा, जिसको यदि वश में होता तो वह कभी नहीं खाता।

ऐसे समय में जब दिल्ली के सरकारी स्कूलों के एक शिक्षक को मजबूरन बच्चों के भोजन के रूप में लाई गई पूरी और सब्जी को चखना पड़ रहा था, जो सब्जी कम और दाल अधिक दिखाई पड़ रही थी, इस आरएनआई संवादददाता ने मेज की दूसरी ओर बैठ कर बेचारे शिक्षक के चेहरे के बदलते रंगों और टिप्पणियों को रिकार्ड किया। कहने की आवश्यकता नहीं कि हमारी बातजीत के फलस्वरूप किसी कार्यवाई से उस बेचारे शिक्षक को बचाने के लिए हम उसकी पहचान उजागर करने से परहेज कर रहे हैं।

दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग द्वारा जारी इस नये हुक्मनामे के पीछे उपमुख्यमंत्री मनीष सिशोदिया की हाल में दिल्ली के विनोद नगर के एक सरकारी स्कूल में किए गये आकस्मिक निरीक्षण को कारण माना जा रहा है। सिशोदिया, जो शिक्षा मंत्रालय भी देखते हैं, स्कूल उस समय पहुंचे थे जब मध्यान्ह भोजन खिलाया जाने वाला था। उन्होंने भोजन को स्वयं चखा और उसको बहुत ही खराब स्तर का पाया। वापिस जाने से पहले सिशोदिया ने आगाह किया कि यदि स्कूल मध्यान्ह भोजन योजना के तहत निर्धारित दिशा निर्देशों को पूरा करने में विफल रहते हैं तो स्कूलों के खिलाफ सख्त कार्यवाई की जाएगी। सिशोदिया ने यह भी यकीन दिलाया था कि मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता और पौष्टिकता में सुधार लाने के लिए शीघ्र ही ‘बड़े कदम’ उठाए जाएंगे।

इस नये हुक्मनामे को जिस के तहत बच्चों को भोजन देने से पहले किसी वरिष्ठ अध्यापक का भोजन चखना अनिवार्य होगा उन बड़े कदमों के रूप में देखा जा रहा है जिन की मनीश सिशोदिया ने भविष्यवाणी की थी। परन्तु रिकार्डिंग में टीचरों की बातचीत से साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि उनको डर है कि यदि वे भोजन की गुणवत्ता की शिकायत करेंगे तो उनके खिलाफ किसी प्रकार की कार्यवाई हो सकती है।

अध्यापक कहते हैंः ‘‘पांच रूप्ये में तुम और क्या दे सकते हो। आज तो रोटी भी पांच रूप्ये में नहीं मिलती। इतनी छोटी सी रकम में कांटरेक्टर अपना लाभ रखेगा और अफसर को भी एक हिस्सा जाएगा।’’ जैसे जैसे अध्यापक भोजन चखते जाते, वह जोर देकर इस रिपोर्टर से कहते जाते कि सब्जी में पानी के अतिरिक्त कुछ भी नहीं है। साथ ही वह यह भी कहते जाते कि जितनी कम रकम कांटरेक्टर को मिलती है उसमें सब्जी में कुछ भी कैसे डाला जा सकता है। ‘‘इसमें न नमक है, न तेल है,’’ उन्होंने क्हा।

शिक्षकों को डर है कि यदि वे भोजन की गुणवत्ता की बुराई करते हैं तो उनके खिलाफ कार्यवाई हो सकती है। उनका मानना है कि यदि वे किसी के खिलाफ कोई ब्यान देते हैं तो उनके खिलाफ कार्यवाई हो सकती है क्योंकि भ्रष्टाचार ऊपर तक फैला हुआ है। आगे की बातचीत में उन्होंने दिल्ली में भ्रष्टाचार मुक्त सरकार की उम्मीदों के टूट जाने की बात भी की।

आर एन आई न्यूज ब्यूरो

image_pdfimage_print

About admin