नेपाली भाईयों की सहायता हेतु दिल खोल आगे आए दिल्लीवासी

भूकंप से तबाह नेपाल के लिए मानवीय सहायता प्रदान करने को मुस्लिम संगठन भी मैदान में उतरे

Nepal2नेपाल में आए भूकंप से हुए भीषण नुकसान की खबरें आना प्रारंभ हुई ही थीं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बहुत ही सराहनीय निर्णय लेते हुए नेपाल को हर प्रकार की सहायता उपलब्ध कराने का न केवल आश्वासन दिया बल्कि चार घंटे के अन्दर राहत सामग्री लेकर पहला भारतीय दल नेपाल के लिए रवाना हो चुका था। गत दिनों में भारतीय सेना ने भूकंप ग्रसित नेपालियों के जख्मों पर हर प्रकार मरहम लगाने की कोशिश की है। इन राहत प्रयासों से प्रेरणा लेते हुए दिल्ली के नागरिक समाज के कुछ वर्गों ने मानवीय सहायता सामग्री एकत्रित करने और भूकंप से तबाह नेपाल में अपने भाईयों को भेजने के लिए युद्ध स्तर पर काम प्रारंभ कर दिया है। अन्य भारतीयों के समान दिल्ली की कुछ मुस्लिम संगठनों ने भी सहायता सामग्री एकत्रित करना प्रारंभ कर दिया है और यह सुनिश्चित करने के लिए कि उनके द्वारा भेजी जा रही राहत सामग्री पीडि़त लोगों तक पहुंचे, वे एक निजी विमान किराये पर ले रही हैं जो काठमांडु में नेपाली अधिकारियों तक सामग्री को पहुंचाएगा।

दिल्ली के अग्रणी निजी स्कूलों में से एक एहल्कोन इन्टरनेशनल स्कूल ने राहत सामग्री इकट्ठा करने और दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास के माध्यम से काठमांडू भेजने की कोशिशों को प्रारंभ कर दिया है।

जब रागिनी और महिका जो एहल्कोन इन्टरनेशनल स्कूल में कक्षा बारहवीं की छात्राएं हैं ने अपने शिक्षकों के समक्ष इच्छा व्यक्त की कि नेपाल में अपने भाईयों के लिए सहानुभूति रखने का अर्थ है कि उनकी दुख की घड़ी में हम उनके साथ खड़े दिखाई दें, तो उनके शिक्षकों ने न केवल उनकी पहल का स्वागत किया बल्कि उनकी इच्छा को प्रिंसिपल अशोक कुमार पांडे के समक्ष पहुंचा दिया। पांडे ने तुरंत ही दोनों छात्राओं को प्रिंसिपल के कमरे में बुलाया और उनसे कहा कि यदि उन्हें वास्तव में लगता है कि नेपाली भाईयों और बहनों के लिए कुछ किया जाना चाहिए तो स्कूल उनके साथ है और नेपाल में भूकंप से आई तबाही के बाद जीवित बचे लोगों को राहत पहुंचाने की उनकी इच्छा को पूरा कराने के लिए वह हर प्रकार की सहायता करेंगे।

प्रिंसिपल पांडे बताते हैंः ‘‘हमारा प्रयास रहता है कि एहल्कोन इंटरनेशल स्कूल के छात्रों को जागरूक बनाएं ताकि वे बाहर की दुनिया की समस्याओं को केवल दर्शक के रूप में न देखें बल्कि उनके साथ सहानुभूति रखें। यही कारण है कि जब हमको पता चला कि कुछ छात्राएं भूकंप ग्रसित नेपालियों की सहायता के लिए कुछ करने की इच्छा रखती हैं तो हमने उन्हें हरी झंडी दे दी।’’

रागिनी और महिका ने विभिन्न कक्षाओं में जाकर बच्चों को नेपाल में भूकंप के कारण आई मानवीय त्रास्दी याद दिलाई और नेपाली लोगों को सहायता पहुंचाने के लिए स्कूल की कोशिशों के बारे में बताया। रागिनी बताती हैंः ‘‘अधिकतर बच्चे जिन से हमने बात की उन्होंने बड़ा उत्साह दिखाते हुए तंबू, दवाईयां, कपड़े, सूखी खाद्य सामग्री, पेयजल, आदि लाने का आश्वासन दिया।’’ एहतियात बरतते हुए स्कूल के अधिकारियों ने निर्देश दिए कि बच्चे केवल वही सामान लाएं जो माता पिता स्वेच्छा से भेजें।

फलस्वरूप आज रागिनी और महिका बच्चों की ओर से लाई जा रही राहत सामग्री के संग्रह की कोशिशों की अगुवाई कर रही हैं तो स्कूल अधिकारी दिल्ली स्थित नेपाली दूतावास से सम्पर्क बनाने की कोशिश में लगे हैं ताकि राहत सामग्री सीधे भूकंप पीडि़तों तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। बच्चों में बहुत उत्साह है और वे हर प्रकार की जरूरत की सामग्री एकत्रित करने में लगे हैं। उदाहरण के रूप में वजीह और शबीह, दो भाई बहन जो इसी स्कूल के छात्र हैं, ने बच्चों के लिए खांसी, सर्दी और बुखार की दवाओं के अतिरिक्त पाउडर दूध भेजने का निर्णय लिया है।

केवल स्कूल ही नहीं, विभिन्न सामाजिक और सामुदायिक संगठनों ने भी युद्ध स्तर पर राहत सामग्री एकत्रित करना प्रारंभ कर दिया है। उत्तर भारत में सामाजिक कार्यकत्र्ताओं की संगठन सोशल वर्कर्स एसोसिएशन भी नेपाल भेजने के लिए राहत सामग्री एकत्रित करने में जुटी है।

नोएडा के मुसलमानों के एक वर्ग ने भी जो अपने को ‘अली वाला’ कहता है नेपाल भूकंप पीडि़तों के लिए राहत सामग्री भेजने का निर्णय लिया है। ग्रुप कैपटेन सिराज मेहदी ने एक निजी विमान की व्यवस्था करने की पेशकश की है जो 2 टन राहत सामग्री नेपाल ले जाएगा।

नोएडा के कर्नल बदर जैदी और अशजे रजा जैदी बताते हैंः ‘‘हम खाद्य सामग्री और कुछ स्वास्थ्य संबंधी खाद्य वस्तुएं भेजना चाहते हैं। कंबल, टेंट, कपड़े और घरेलू सामान भी एकत्र किया जा रहा है। समुदाय के कुछ सदस्य नकदी भी दान कर रहे हैं जिस को नेपाल में अधिकारियों के हवाले कर दिया जाएगा।’’

कर्नल बदर जैदी बताते हैंः ‘‘यह रजब का चंद्र मास है। इसी मास में इमाम अली का जन्म हुआ था। इमाम अली रात के अंधेरे में गरीब और बेसहारा को तलाश कर उन तक भोजन आदि पहुंचाया करते थे। जब वह मुसलमानों के खलीफा हुए तो कुछ दिनों पश्चात उन्होंने सार्वजनिक घोषणा कर दी कि यदि कोई व्यक्ति ऐसा हो जो रात को बिना भोजन सोया हो या जिस के शरीर पर कपड़ा नहीं हो तो सामने आए। कोई भी सामने नहीं आया।’’ कर्नल जैदी कहते हैं कि यह मुसलमानों का दुर्भाग्य है कि उन्होंने इमाम अली की बुलंद शिक्षाओं को भुला दिया। ‘‘संकट में अपने नेपाली भाईयों की सहायता करके हम इमाम अली के नक्शेकदम का पालन करना चाहते हैं जो हमेशा शिया मुसलमानों के मार्गदर्शक बने रहेंगे,’’ जैदी कहते हैं।

आरएनआई न्यूज ब्यूरो

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